Pakur : पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले की झारखंड में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। झारखंड के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता आलमगीर आलम ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।
आलमगीर आलम ने कहा कि राजनीति में हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है और सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन विपक्षी नेताओं पर जानलेवा हमले जैसी घटनाएं लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
इस दौरान पूर्व मंत्री ने कांग्रेस भवन में पार्टी कार्यकर्ताओं और बूथ लेवल एजेंटों के साथ बैठक भी की। बैठक का उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी देना और वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची में सुनिश्चित कराने को लेकर रणनीति तैयार करना था।
बैठक में कार्यकर्ताओं को एसआईआर प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी गई। आलमगीर आलम ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मतदाताओं और बूथ लेवल अधिकारियों का सहयोग करें ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से न छूटे।
उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं को “अनमैप्ड” श्रेणी में रखा गया है, उनके आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा कराने में पार्टी कार्यकर्ता सहयोग करें। इससे वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची में सुरक्षित रहेंगे और उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होना पड़ेगा।
पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं का निधन हो चुका है, उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया में भी सहयोग किया जाना चाहिए, ताकि मतदाता सूची अधिक सटीक और अद्यतन बन सके।
आलमगीर आलम ने दावा किया कि कुछ ऐसे मतदाताओं के नाम भी सूची से बाहर हुए हैं, जिनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दर्ज था। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों पर पार्टी आगे चर्चा कर उचित कदम उठाएगी। बैठक में कांग्रेस के कई पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष, प्रखंड अध्यक्ष और बूथ लेवल एजेंट मौजूद रहे।


