Ranchi : झारखंड में डिजिटल एप आधारित कैब और बाइक चालकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त हो गई है। कंपनियों के साथ बातचीत और सहमति बनने के बाद चालकों ने काम पर लौटने का फैसला किया, जिसके बाद रांची, जमशेदपुर और बोकारो सहित कई शहरों में कैब सेवाएं फिर से सामान्य होने लगी हैं।
हड़ताल में राज्यभर के करीब 13 हजार से अधिक कैब चालक शामिल थे। चालकों का कहना था कि वर्ष 2019 के बाद से किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। इससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ा और परिचालन लागत बढ़ती चली गई।
चालकों ने यह भी आरोप लगाया कि निजी वाहनों को ऐप आधारित सेवाओं से जोड़ने से व्यावसायिक ड्राइवरों की कमाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, बिना स्पष्ट कारण के ड्राइवरों की आईडी डिएक्टिवेट किए जाने की समस्या को भी उन्होंने गंभीर मुद्दा बताया।
हड़ताल के दौरान राज्य के प्रमुख शहरों में कैब सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों को वैकल्पिक साधनों जैसे ऑटो और निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ा, जिससे किराए में भी बढ़ोतरी देखी गई।
अब हड़ताल समाप्त होने के बाद ओला, उबर और रैपिडो जैसी सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं। ऐप पर कैब की उपलब्धता फिर से बढ़ने लगी है और चालक नियमित रूप से बुकिंग स्वीकार कर रहे हैं, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिली है।
चालक संगठनों ने बताया कि कंपनियों के साथ उनकी मांगों पर सकारात्मक चर्चा हुई है। कुछ मुद्दों पर लिखित सहमति बनी है, जबकि अन्य बिंदुओं पर आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है। चालकों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में किराया निर्धारण और आईडी डिएक्टिवेशन जैसे मामलों का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
हड़ताल खत्म होने के बाद यात्रियों और चालकों दोनों ने राहत की सांस ली है। सेवाओं के सामान्य होने से राज्य में ऐप आधारित परिवहन व्यवस्था एक बार फिर पटरी पर लौटने लगी है, जिससे दैनिक आवागमन आसान हो गया है।



