Dumka/Jamtara : हूल दिवस के अवसर पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संथाल हूल के महानायक वीर सिदो-कान्हू के वंशजों और ग्रामीणों के साथ अन्याय किया जा रहा है। उनका कहना था कि भोगनाडीह में श्रद्धांजलि कार्यक्रम पर प्रशासनिक प्रतिबंध लगाकर ऐतिहासिक विरासत का अपमान किया गया है।
चंपाई सोरेन ने कहा कि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। बड़ी संख्या में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है, जबकि शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों को अनुमति लेने और बॉन्ड भरने जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1855 में वीर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संथाल हूल का बिगुल फूंका था। उन्होंने आरोप लगाया कि आज उन्हीं शहीदों के वंशजों को श्रद्धांजलि देने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनता इस अपमान का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।

चंपाई सोरेन ने पिछले वर्ष के हूल दिवस का भी जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय शहीदों के वंशजों और समर्थकों पर लाठीचार्ज किया गया था, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के साथ भी दुर्व्यवहार हुआ था और सरकार स्वतंत्र रूप से हूल दिवस मनाने की अनुमति नहीं देना चाहती।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आदिवासियों के हितों की बात करने वाली वर्तमान सरकार ने भोगनाडीह के विकास के लिए कोई ठोस पहल नहीं की है। उनके अनुसार, शहीदों के वंशजों ने उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित किया था और इसी वजह से प्रशासन ने आयोजन पर सख्ती बरती। दुमका में उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे बढ़ रहे हैं और राज्य में एक नए जनआंदोलन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान पर चंपाई सोरेन ने कहा कि संताल परगना में आदिवासियों की घटती आबादी और जमीन से जुड़े विवादों को देखते हुए यह प्रक्रिया आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि इससे बाहरी और अवैध रूप से जुड़े लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी तथा आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा हो सकेगी।
वहीं हूल दिवस के अवसर पर दुमका विधायक बसंत सोरेन ने सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि वीर सिदो-कान्हू का बलिदान समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है और राज्य सरकार उनके सपनों को साकार करने के लिए विकास एवं जनकल्याण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।



