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अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजने की मांग हुई तेज, ओडिशा से रांची पहुंचे झामुमो कार्यकर्ता, सीएम को सौंपा ज्ञापन

Ranchi : झारखंड में राज्यसभा की रिक्त सीट को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और दिशोम गुरु Shibu Soren के निधन के बाद खाली हुई राज्यसभा सीट पर उनकी पुत्री Anjani Soren Marandi को भेजने की मांग लगातार मजबूत होती जा रही है। इस मांग को लेकर झामुमो कार्यकर्ताओं ने रांची में शक्ति प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री से औपचारिक आग्रह किया है।

राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के बीच ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले से बड़ी संख्या में झामुमो नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता बसों के काफिले के साथ रांची पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री Hemant Soren से मुलाकात कर अंजनी सोरेन मरांडी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की मांग से जुड़ा ज्ञापन सौंपा। इस दौरान मुख्यमंत्री आवास के बाहर समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अपना समर्थन भी जताया।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिबू सोरेन ने झारखंड और आदिवासी समाज के लिए जो योगदान दिया है, उसे देखते हुए उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर परिवार की सदस्य अंजनी सोरेन को मिलना चाहिए। उनका मानना है कि राज्यसभा में अंजनी सोरेन की मौजूदगी पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाओं का सम्मान होगी।

झारखंड के अलावा ओडिशा में भी झामुमो के कार्यकर्ता इस मांग को लेकर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में झामुमो का मजबूत जनाधार है और वहां के कार्यकर्ता भी चाहते हैं कि रिक्त सीट पर अंजनी सोरेन को प्रतिनिधित्व मिले। समर्थकों का दावा है कि यह केवल एक राजनीतिक मांग नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं और आम समर्थकों की भावना से जुड़ा विषय है।

गौरतलब है कि अंजनी सोरेन मरांडी पहले भी सार्वजनिक रूप से राज्यसभा जाने की इच्छा जता चुकी हैं। एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने सक्रिय राजनीति में भूमिका निभाने और संगठन के लिए काम करने की अपनी इच्छा व्यक्त की थी। इसके बाद से उनके नाम को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर चर्चा लगातार बढ़ती रही है।

राज्यसभा चुनाव को लेकर झामुमो नेतृत्व अभी अंतिम निर्णय की प्रक्रिया में है। पार्टी के सामने कई संभावित नामों पर विचार करने की चुनौती है, लेकिन कार्यकर्ताओं द्वारा जिस तरह से अंजनी सोरेन के पक्ष में माहौल बनाया जा रहा है, उससे उनकी दावेदारी को बल मिला है।

अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि झामुमो कार्यकर्ताओं की मांग को स्वीकार करते हुए पार्टी अंजनी सोरेन मरांडी को उम्मीदवार बनाती है या फिर राज्यसभा चुनाव के लिए किसी अन्य चेहरे पर भरोसा जताती है।

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