Dhanbad: झारखंड के धनबाद में मनरेगा कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 68 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। सोमवार को कर्मचारियों ने रणधीर वर्मा चौक पर धरना-प्रदर्शन कर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जल्द मांगें पूरी करने की अपील की।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांग ग्रेड पे लागू नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताल के चलते अब ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं पर भी असर साफ दिखाई देने लगा है।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में जुटे मनरेगा कर्मचारियों ने सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने की कोशिश की। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्षों से योजनाओं को सफल बनाने में योगदान देने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
मनरेगा कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष Yaseen Ansari ने बताया कि 12 मार्च 2026 से पूरे राज्य के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से मनरेगा कर्मी सिर्फ मनरेगा ही नहीं, बल्कि कई अन्य कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
यासीन अंसारी ने दावा किया कि अब तक 155 मनरेगा कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, लेकिन उनके आश्रितों को न तो नौकरी दी गई और न ही किसी प्रकार की आर्थिक सहायता मिली। उन्होंने कहा कि मृत कर्मचारियों के परिवार बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं।
हड़ताल का असर अब मनरेगा के तहत चल रही योजनाओं पर पड़ने लगा है। कुआं, तालाब, डोभा निर्माण और प्रधानमंत्री आवास योजना सहित कई विकास कार्य अधूरे पड़े हैं। वहीं ग्रामीण मजदूरों को भी काम नहीं मिल पा रहा है।
जानकारी के अनुसार धनबाद जिले में करीब 304 मनरेगा कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि पूरे झारखंड में इनकी संख्या लगभग 5 हजार है। सभी कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं और सरकार से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।


