Dhanbad: झारखंड के धनबाद में महिला सशक्तिकरण की जमीनी सच्चाई सामने आई है, जहां गांव-गांव महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली महिलाएं खुद ही उपेक्षा का शिकार बन गई हैं। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़ी करीब एक हजार महिला कैडर पिछले आठ महीनों से मानदेय के इंतजार में हैं, जिससे उनकी स्थिति बेहद खराब हो गई है।
मानदेय नहीं मिलने से परेशान इन महिलाओं ने अब चुप्पी तोड़ते हुए जिला समाहरणालय पहुंचकर धरना शुरू कर दिया है। बड़ी संख्या में एकत्रित महिला कैडर ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और कहा कि वे लगातार काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें उनकी मेहनत का उचित भुगतान नहीं मिल रहा है।
प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाती हैं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का काम करती हैं। वे न केवल आर्थिक रूप से महिलाओं को मजबूत करती हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित भी करती हैं।
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महिला कैडर ने बताया कि वे बैंक से ऋण दिलाने में भी अहम भूमिका निभाती हैं, जिससे गांव की महिलाओं की आजीविका बेहतर हो सके। इसके अलावा वे सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी लगातार काम कर रही हैं।
हालांकि, इतने महत्वपूर्ण कार्यों के बावजूद उन्हें पिछले आठ महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनकी खुद की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। कई महिलाओं ने बताया कि अब उनके लिए परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है।
धरना दे रही महिलाओं ने इसे सीधी उपेक्षा बताते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन को उनके काम की कद्र करनी चाहिए। उनका कहना है कि अगर समय पर भुगतान नहीं किया गया, तो उनका आंदोलन और तेज किया जाएगा।
महिला कैडर ने प्रशासन से जल्द से जल्द बकाया मानदेय का भुगतान करने की मांग की है, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें और अपने सामाजिक कार्यों को पहले की तरह जारी रख सकें।



