Palamu: पलामू जिले में आयोजित जिला स्तरीय बैंकर्स समिति (DLBC) की बैठक में बैंकों के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए गए। बैठक में झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने साफ कहा कि जब जिले के लोगों का हजारों करोड़ रुपये बैंकों में जमा है, तो उन्हें पर्याप्त ऋण क्यों नहीं दिया जा रहा है।
बैठक में सामने आया कि पलामू के लोगों का विभिन्न बैंकों में कुल 10,345 करोड़ रुपये जमा है, लेकिन इसके मुकाबले बैंकों द्वारा केवल 40.73 प्रतिशत ही ऋण वितरण किया गया है। यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है, खासकर तब जब ऋण वितरण की दर लगातार गिर रही है। पिछले छह महीनों में इसमें 0.48 प्रतिशत की और गिरावट दर्ज की गई है।
वित्त मंत्री ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जो बैंक ऋण देने और सामाजिक दायित्व निभाने में रुचि नहीं दिखाएंगे, उनमें सरकारी राशि जमा नहीं की जाएगी। उन्होंने बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे अपने प्रदर्शन में सुधार करें और तय लक्ष्य को हर हाल में हासिल करें।

बैठक में यह भी बताया गया कि झारखंड में औसतन ऋण वितरण दर 55.63 प्रतिशत है, जबकि पलामू में यह काफी कम है। इससे यह साफ होता है कि जिले में बैंकिंग गतिविधियां अपेक्षा के अनुरूप नहीं चल रही हैं और लोगों को आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है।
समीक्षा के दौरान कृषि क्षेत्र की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। लक्ष्य के मुकाबले केवल 9 प्रतिशत कृषि ऋण ही वितरित किया गया, जबकि लक्ष्य 30 प्रतिशत था। इससे किसानों को आवश्यक आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है, जिससे कृषि विकास प्रभावित हो रहा है।
इसके अलावा, बैंकों की भूमिका रोजगार सृजन और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी कमजोर पाई गई। बैठक में कहा गया कि बैंकों को इन क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास को गति मिल सके।
कुल मिलाकर, बैठक में बैंकों की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार ने साफ संकेत दिया है कि यदि प्रदर्शन में सुधार नहीं हुआ, तो कड़े कदम उठाए जाएंगे। यह कदम न केवल बैंकिंग व्यवस्था को सुधारने के लिए है, बल्कि आम लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


