Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पेयजल संकट का मुद्दा जोर-शोर से उठा, जहां विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के विधायकों ने इस गंभीर समस्या पर चिंता जताई। प्रश्नकाल के दौरान राज्य के कई इलाकों में पानी की कमी को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया।
झामुमो विधायक हेमलाल मुर्मू ने संथाल परगना क्षेत्र में खराब पड़े चापाकलों की स्थिति को उठाया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो हालात इतने खराब हो सकते हैं कि लोग प्यास से मरने लगेंगे।
इस पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने जवाब देते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,44,906 चापाकलों की मरम्मत की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा कि पाकुड़ जिले में 4,417 चापाकल मरम्मत के दायरे में हैं, जिनमें से 2,679 का काम पूरा किया जा चुका है।
मंत्री ने यह भी बताया कि चापाकलों की खराबी की शिकायतों के समाधान के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कई क्षेत्रों में जलस्तर नीचे जाने के कारण चापाकलों से पानी नहीं निकल रहा है, जिससे समस्या और गंभीर हो रही है।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि क्या सरकार इतनी कमजोर हो गई है कि लोगों को पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है। उन्होंने सरकार से ठोस और त्वरित कार्रवाई की मांग की।
बाबूलाल मरांडी ने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़े तो सरकार को हर संभव उपाय करना चाहिए, यहां तक कि गंगा का पानी भी लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने इसे सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी बताया।
मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने जवाब में कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है और हर हाल में अंतिम व्यक्ति तक पेयजल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि चापाकलों की मरम्मत के लिए फंड जारी किया जा चुका है और सभी क्षेत्रों की लगातार समीक्षा की जा रही है।
सदन में हुई इस बहस ने साफ कर दिया कि झारखंड में पेयजल संकट एक बड़ा मुद्दा बन चुका है, जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों की नजरें टिकी हुई हैं।


