Khunti: झारखंड पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार 12 मार्च को कर्रा प्रखंड में झारखंड अलग राज्य की मांग दिवस की 53वीं वर्षगांठ मनाई। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने झारखंड आंदोलन के पुरोधाओं को याद करते हुए उनके योगदान को नमन किया और झारखंड आंदोलन के इतिहास पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बताया कि झारखंड आंदोलन को संगठित रूप देने में स्वर्गीय एन.ई. होरो की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके नेतृत्व में 12 मार्च 1973 को झारखंड पार्टी के हजारों कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे थे और संसद भवन में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को वृहद झारखंड राज्य गठन की मांग को लेकर पहला मांग पत्र सौंपा गया था। उस समय प्रस्तावित झारखंड राज्य में बिहार, बंगाल, उड़ीसा और मध्यप्रदेश के कुल 26 जिलों को शामिल करने की मांग रखी गई थी।
वक्ताओं ने बताया कि झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता स्वर्गीय एन.ई. होरो का जन्म 31 मार्च 1925 को रांची जिले (वर्तमान खूंटी जिला) के कर्रा प्रखंड अंतर्गत सुनगी गांव में हुआ था। वर्ष 1948 में आदिवासी महासभा का गठन हुआ था। आजाद भारत के पहले आम चुनाव 1952 के दौरान आदिवासी महासभा को राजनीतिक दल के रूप में परिवर्तित कर झारखंड पार्टी का गठन किया गया। उस समय झारखंड पार्टी के 52 विधायक जीतकर बिहार विधानसभा पहुंचे और विधानसभा में मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई। पार्टी का एक सांसद भी हुआ करता था।
बताया गया कि वर्ष 1963 में झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता जयपाल सिंह मुंडा ने झारखंड पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया, जिसके बाद आदिवासी समाज में नेतृत्व का संकट उत्पन्न हो गया। इसके बाद 1965 में रांची के इंदीपीढ़ी (वर्तमान हिंदपीढ़ी) में आयोजित विशाल आमसभा में सर्वसम्मति से स्वर्गीय एन.ई. होरो को आंदोलन का सर्वोच्च नेता चुना गया। इसके बाद उन्होंने झारखंड पार्टी की कमान संभाली और झारखंड आंदोलन को नई दिशा दी।
राजनीति में सक्रिय रहते हुए एन.ई. होरो सात बार विधायक तथा दो बार सांसद चुने गए। उनके नेतृत्व में झारखंड आंदोलन को नई मजबूती मिली और झारखंड राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया गया।
कार्यक्रम के दौरान झारखंड पार्टी के केंद्रीय सचिव फ्रेंकलिन धान ने जानकारी देते हुए बताया कि स्वर्गीय एन.ई. होरो की 100वीं जयंती के अवसर पर 31 मार्च 2026 को सुबह 10:30 बजे गोविंदपुर मिशन में पत्थरगढ़ी कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने झारखंड पार्टी के कार्यकर्ताओं एवं झारखंड आंदोलन से जुड़े लोगों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि झारखंड आंदोलन के इतिहास और शहीदों के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि राज्य के निर्माण में उनके संघर्ष को भुलाया न जा सके।



