Ranchi: हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जारी समन की कथित अवहेलना से जुड़ा है।
यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमलया बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। पीठ ने सोरेन की याचिका पर ईडी को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया। सोरेन ने अपनी याचिका में न केवल आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी है, बल्कि ईडी द्वारा बार-बार जारी किए गए समन को भी सवालों के घेरे में रखा है।
सुनवाई के दौरान तीखी बहस
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि ट्रायल लगभग पूरा हो चुका है और सात समन जारी किए गए थे, लेकिन सोरेन एक बार भी पेश नहीं हुए। वहीं सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि उनके मुवक्किल तीन बार ईडी के सामने पेश हुए थे और उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था।
ईडी के वकील ने यह भी तर्क दिया कि सोरेन की क्वाशिंग याचिका देरी से दाखिल की गई है, क्योंकि मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने के एक साल बाद इसे दायर किया गया।
“पहले बड़े मामलों पर ध्यान दें” – सुप्रीम कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मौखिक टिप्पणी में कहा, “हमने अखबार में पढ़ा कि आप (ईडी) बड़ी संख्या में शिकायतें दाखिल कर रहे हैं। पहले उन मामलों पर ध्यान केंद्रित करें और अपनी ऊर्जा वहीं लगाएं। इससे कुछ रचनात्मक परिणाम आएंगे।”
न्यायमूर्ति बागची ने भी एजेंसी को प्रभावी अभियोजन पर ध्यान देने की सलाह देते हुए टिप्पणी की कि इस तरह की कार्यवाहियां अपने उद्देश्य तक पहुंच चुकी हैं।
हाईकोर्ट से झटका, सुप्रीम कोर्ट से राहत
इससे पहले 15 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट ने ईडी द्वारा दायर शिकायत मामले में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान को खारिज करने से इनकार कर दिया था, जो सोरेन के लिए झटका माना गया था।
ईडी ने आरोप लगाया था कि जमीन घोटाले से जुड़े मामले में जारी समन पर सोरेन उपस्थित नहीं हुए। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस कार्रवाई पर फिलहाल रोक लग गई है।
आगे की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर इस मामले की दिशा तय होगी।


