Simdega : झारखंड में मानव तस्करी के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान के तहत रांची रेलवे स्टेशन पर एक बड़ा प्रयास विफल कर दिया गया। Railway Protection Force (आरपीएफ) की सतर्कता से सिमडेगा जिले की दो नाबालिग बालिकाओं को दिल्ली ले जाए जाने से बचा लिया गया।
मंगलवार देर रात ट्रेन संख्या 12825, झारखंड संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के रांची स्टेशन पर पहुंचने के दौरान आरपीएफ पोस्ट द्वारा विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान एक महिला दो नाबालिग लड़कियों के साथ संदिग्ध हालत में देखी गई। पूछताछ में महिला ने अपना नाम रेशमा देवी (40 वर्ष), निवासी किराड़ी, दिल्ली बताया।
अलग-अलग पूछताछ में दोनों बालिकाओं ने बताया कि वे गांव बंबालकेरा, थाना थेताईटांगर, जिला सिमडेगा की रहने वाली हैं और उन्हें घरेलू काम के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था।
वेतन के नाम पर कमीशन का खेल
महिला उपनिरीक्षक सुनीता तिर्की (डीएनएफटी) की विस्तृत पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रत्येक बालिका के लिए 14-15 हजार रुपये मासिक वेतन तय किया गया था। हालांकि, इस राशि में से महिला 2-3 हजार रुपये प्रतिमाह कमीशन के तौर पर लेने वाली थी।
पूछताछ के दौरान महिला ने यह भी स्वीकार किया कि वह पहले भी झारखंड से बालिकाओं को दिल्ली ले जा चुकी है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि उसके खिलाफ वर्ष 2023 में गुमला थाना में अपहरण, दुष्कर्म, मानव तस्करी और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े गंभीर मामले दर्ज हैं।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
महिला के पास से स्लीपर क्लास का टिकट और एक मोबाइल फोन जब्त किया गया। बुधवार को उसे गिरफ्तार कर एएचटीयू/कोतवाली थाना को सौंप दिया गया, जहां संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
दोनों नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षा के मद्देनजर सुरक्षित आश्रय गृह ‘प्रेमाश्रय’ में रखा गया है।
इस पूरी कार्रवाई में आरपीएफ निरीक्षक शिशुपाल कुमार, उप निरीक्षक सोहन लाल, स्टाफ संजय यादव, कुमारी दिव्या सिंह, महिला उपनिरीक्षक सुनीता तिर्की और महिला स्टाफ रेनु की अहम भूमिका रही। आरपीएफ की तत्परता से एक संभावित मानव तस्करी की बड़ी घटना टल गई।



