Khunti: कर्रा प्रखंड के कौशांबी गांव में शुक्रवार को बेड़ों–तमाड़ भाया कर्रा मुख्य सड़क से प्रस्तावित बाईपास सड़क निर्माण के विरोध में कौशांबी, कसिरा, जोने, लोयकेल और तिमड़ा गांव के सैकड़ों रैयतों की एक विशाल बैठक आयोजित की गई। बैठक में बाईपास सड़क निर्माण कार्य के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया गया और सरकार से योजना पर पुनर्विचार की मांग की गई। 
बैठक को संबोधित करते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष अनूप लकड़ा ने कहा कि बाईपास सड़क निर्माण के नाम पर आदिवासी-मूलवासी समुदाय की जमीन छीनी जा रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जबरन निर्माण कार्य शुरू किया गया तो रैयतों को उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से अविलंब निर्माण कार्य रोकने की मांग करते हुए कहा कि ग्रामीण विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन यदि खेत-खलिहान और घर-द्वार ही छिन जाएं तो ऐसे विकास का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
ग्रामीणों ने बताया कि कर्रा–खूंटी मुख्य सड़क के चौड़ीकरण का कार्य उसी मार्ग पर किया जाए। उनका आरोप है कि पुराने सड़क मार्ग पर करीब 200 फीट जमीन ली जा रही है, जबकि नए बाईपास के लिए लगभग 400 फीट जमीन अधिग्रहण की बात कही जा रही है। इससे छोटे किसानों की कृषि योग्य भूमि, घर-द्वार, कब्रिस्तान और पूजा स्थल प्रभावित होंगे। कई परिवारों के बेघर होने की आशंका से क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। “जान देंगे पर जमीन नहीं देंगे” के नारों के साथ सभा का समापन किया गया। बैठक में बड़ी संख्या में पुरुषों के साथ महिलाएं भी उपस्थित रहीं और एकजुट होकर बाईपास योजना का विरोध जताया।



