Khunti: खूंटी जिले के हूटार स्थित जियारप्पा में एदेल संगा 22 पड़हा 56 मौजा ऐतिहासिक पारंपरिक पड़हा जतरा का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर पड़हा राजा सोमा मुंडा की स्मृति में पत्थलगड़ी की गई। कार्यक्रम में उनके जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए किए गए संघर्षों और आंदोलन को पत्थर पर उकेरा गया, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान और बलिदान को जान सकें।

जतरा में 22 पड़हा, 56 मौजा से पड़हा राजा, मुंडा, मानकी और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। सभी की उपस्थिति में पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ विधिवत पूजा-अर्चना कर पत्थर स्थापित किया गया। पूरे आयोजन के दौरान पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-नगाड़ों और सामुदायिक एकजुटता ने वातावरण को भावुक और गौरवपूर्ण बना दिया। 
कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व मंत्री देवकुमार धान ने कहा कि यह पत्थलगड़ी उसी जमीन पर की जा रही है, जिसे बचाने के लिए पड़हा राजा सोमा मुंडा ने आंदोलन किया था। उन्होंने मांग की कि इस स्थल पर सोमा मुंडा की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाए और यहां प्रतिवर्ष भव्य एवं राज्यस्तरीय जतरा का आयोजन हो।
उन्होंने जमीन दलालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वे इस भ्रम में न रहें कि आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा। “आंदोलन अब पहले से और तेज होगा। हम सभी मिलकर पड़हा राजा के संघर्षों को आगे बढ़ाएंगे और जल, जंगल, जमीन की रक्षा करेंगे,” उन्होंने कहा।
ज्ञात हो कि बीते 7 जनवरी को खूंटी थाना क्षेत्र अंतर्गत जमुआदाग के समीप अपराधियों ने गोली मारकर पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या कर दी थी। इस घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया था और ग्रामीणों ने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन भी किया था।
जियारप्पा में आयोजित यह पत्थलगड़ी कार्यक्रम न केवल एक श्रद्धांजलि सभा रहा, बल्कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के संकल्प को दोहराने का भी मंच बना, जहां लोगों ने एक स्वर में सोमा मुंडा के अधूरे संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।



