Khunti: संगा पड़हा राजा सोमा मुंडा हत्याकांड को लेकर बीते दिनों खूंटी जिले समेत पूरे झारखंड में सामाजिक संगठनों और आम जनता के बीच जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। इस हत्याकांड के विरोध में 8 जनवरी को खूंटी जिला बंद और 17 जनवरी को संपूर्ण झारखंड बंद का आह्वान किया गया, जो अभूतपूर्व रूप से सफल रहा। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने लगातार सोमा मुंडा के मुख्य हत्यारे, साजिशकर्ता और जमीन से जुड़े वास्तविक सौदागरों की गिरफ्तारी की मांग की है। 
इधर, झारखंड सरकार और खूंटी पुलिस द्वारा मामले की गुत्थी सुलझाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अब तक की पुलिसिया कार्रवाई से सामाजिक संगठनों के अगुवा और आम जनमानस संतुष्ट नहीं हैं। संगठनों का आरोप है कि जिस विवादित भूमि को पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या का कारण बताया जा रहा है, उससे जुड़े मुख्य साजिशकर्ता और वास्तविक जमीन सौदागर को प्रशासन अब तक सार्वजनिक रूप से सामने लाने में विफल रहा है।
पुलिस ने अनुसंधान और जांच के नाम पर इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा है। इनमें जियारपा गांव के बहा मुंडा, अनिश मुंडा, रविया पाहन और रामेश्वर संगा भी शामिल हैं। इन चारों ने अपनी गिरफ्तारी को माननीय उच्च न्यायालय, रांची में चुनौती दी है। 
मामले को लेकर दायर आपराधिक याचिका संख्या 70/2026 में आरोप लगाया गया है कि खूंटी पुलिस द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(2) का उल्लंघन करते हुए बहा मुंडा, अनिश मुंडा, रविया पाहन और रामेश्वर संगा को 8 जनवरी 2026 से 13 जनवरी 2026 तक अवैध हिरासत में रखा। याचिका में यह भी आरोप है कि हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और बाद में जबरन जेल भेज दिया गया।
याचिका में प्रत्येक पीड़ित के लिए 20-20 लाख रुपये क्षतिपूर्ति की मांग की गई है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय, रांची ने याचिका स्वीकार कर ली है और राज्य सरकार, विशेष रूप से आरक्षी अधीक्षक, खूंटी को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इस पूरे मामले की जानकारी याचिकाकर्ताओं नेहा मिंज, दुर्गा मुंडा, छाया पाहन और हरकू पाहन ने साझा की। उन्होंने कहा कि जब तक सोमा मुंडा हत्याकांड के वास्तविक दोषियों और साजिशकर्ताओं को बेनकाब कर गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक समाजिक संगठनों का संघर्ष जारी रहेगा।



