Khunti: कर्रा प्रखंड के लरता पंचायत अंतर्गत बुड़का गांव में करीब 5 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से निर्मित 1.65 लाख लीटर क्षमता वाले जलमीनार से जुड़े आठ गांवों में पिछले कई महीनों से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप है। ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण कांटी, मेरले, सुवारी, सुवारी जलटंड़ा, घोरपिंडा, बुड़का, जोरको और कोटलो गांव के लोग पानी के लिए परेशान हैं। ग्रामीणों के अनुसार जून 2025 से जलापूर्ति बंद है, जबकि कोटलो और जोरको गांव तक शुरुआत से ही पानी नहीं पहुंच पाया।

ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2022 से जलमीनार से पानी आपूर्ति का केवल ट्रायल ही चल रहा है। कुल 600 उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिया गया, लेकिन इनमें से केवल 165 उपभोक्ताओं को ही पानी मिला, वह भी अनियमित रूप से। इसके अलावा छाता नदी में निर्मित इंटेक वेल भी क्षतिग्रस्त हो गया है। जलसहियाओं का कहना है कि जलमीनार से जुड़े 63 केबी का बिजली ट्रांसफार्मर पिछले छह माह से खराब है। उनका स्पष्ट कहना है कि 100 केबी का ट्रांसफार्मर लगाए जाने के बाद ही नियमित जलापूर्ति संभव हो पाएगी।
पेयजल संकट को लेकर सोमवार को बुड़का गांव स्थित जलमीनार परिसर में जलसहियाओं की बैठक आयोजित की गई। बैठक में लरता पंचायत की मुखिया संगीता कच्छप उपस्थित रहीं। इस दौरान सभी जलसहियाओं ने अपने-अपने गांवों की समस्याएं रखीं और जल्द से जल्द पेयजल सुविधा बहाल करने की मांग की। साथ ही उपभोक्ताओं से यह भी अपील की गई कि जलापूर्ति सुचारु रखने के लिए प्रति माह 60 रुपये शुल्क नियमित रूप से जमा करें।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि पूर्व में जलमीनार पेयजल आपूर्ति समिति का गठन किया गया है, लेकिन समिति के खाते में अब तक पर्याप्त फंड जमा नहीं हो पाया है, जिससे क्षतिग्रस्त कार्यों की मरम्मत में कठिनाई आ रही है। वहीं, संवेदक द्वारा भी कार्य को पूरी तरह पूर्ण नहीं करने की बात सामने आई।
बैठक में मुखिया संगीता कच्छप, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर एलीन गुड़िया, जलसहियाएं सुचिता देवी, सुमित्रा कुमारी, बसंती देवी, जम्बी होरो, कलावती देवी, बहालेन धनवार, सुहामनी होरो, ऑपरेटर मदन कुमार सिंह, बलेश्वर बड़ाइक, कुलेश्वरी देवी सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में जल्द से जल्द पेयजल संकट के स्थायी समाधान की मांग की।



