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सरस मेला बना महिला सशक्तिकरण का मंच, JSLPS के सहारे देवघर की महिलाएं लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई कहानी

Deoghar: देवघर में चल रहे सरस मेले ने सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन का रूप नहीं लिया है, बल्कि यह महिलाओं की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। मेले में देसी और हस्तनिर्मित उत्पादों की स्टॉल पर लगी भीड़ यह दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाएं अब अपने हुनर के दम पर बाजार में अपनी अलग पहचान बना रही हैं।

महिलाओं को सशक्त बना रहा JSLPS

झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (JSLPS) के सहयोग से जुड़ी महिलाएं आज समाज को यह संदेश दे रही हैं कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। पहले जहां घर की आर्थिक जिम्मेदारी पुरुषों पर होती थी, आज महिलाएं घर के साथ-साथ परिवार की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बन चुकी हैं।

JSLPS से जुड़ने के बाद हालात में बदलाव आया: कारोबारी

सरस मेले में साहिबगंज से आईं सिकु मंडल ने बताया कि JSLPS से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई। टेडी बियर बनाकर वह अब खुद के पैरों पर खड़ी हैं और पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

ब्याज दर कई महिलाओं के लिए समस्या है: कारोबारी

किसी भी सफलता के बीच कुछ चुनौतियां भी हैं। कारोबारी आरती कुमारी ने कहा कि JSLPS महिलाओं के जीवन स्तर को ऊंचा उठा रहा है, लेकिन लोन पर लगने वाले ब्याज दरों ने कई महिलाओं के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उनका कहना है कि अगर ब्याज दरों में कमी या समाप्ति हो जाए, तो महिलाएं और भी ज्यादा सशक्त बन सकती हैं।

सरस मेले से लोगों को मिल रहा फायदा

देवघर जिला आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों में आता है, जहां बड़ी आबादी अभी भी गरीबी से जूझ रही है। ऐसे में JSLPS का यह प्रयास महत्वपूर्ण है। मेले के माध्यम से महिलाओं को न केवल रोजगार मिल रहा है, बल्कि उनकी आत्मनिर्भरता भी बढ़ रही है। सरस मेला इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि अगर महिलाओं को अवसर और सहयोग मिले, तो वे अपनी तकदीर खुद लिख सकती हैं।

मेले में अन्य राज्यों की भी भागीदारी

मेले में स्टॉल लगाने पहुंचे राजस्थान के प्रकाश मौर्य ने कहा कि झारखंड की महिलाएं मजबूत हो रही हैं और यहां के महिलाओं के सहयोग से दूसरे राज्यों की महिलाएं भी अपने उत्पाद बना कर बाजार में बेच रही हैं।

सरस मेला अब महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक कहानी बन चुका है, जो यह साबित कर रहा है कि जब महिलाओं को अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में अपना नाम चमका सकती हैं।

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