Khunti: पड़हा राजा सोमा मुंडा की निर्मम हत्या के मुख्य आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी नहीं होने से आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। न्याय की मांग को लेकर तथा झारखंड बंद के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को बंदी की पूर्व संध्या पर खूंटी में आदिवासी समन्वय समिति की ओर से शांतिपूर्ण मशाल जुलूस निकाला गया। इस मशाल जुलूस के माध्यम से आदिवासी समाज ने एक स्वर में यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक सोमा मुंडा हत्याकांड के वास्तविक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक आंदोलन निरंतर जारी रहेगा। 
मशाल जुलूस से एक दिन पूर्व आदिवासी समन्वय समिति द्वारा खूंटी के करम अखाड़ा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में समिति के पदाधिकारियों ने प्रशासन की अब तक की कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस जघन्य हत्याकांड में न तो मुख्य आरोपी और न ही घटना के पीछे की साजिश रचने वाले लोग अब तक पुलिस की गिरफ्त में आए हैं। समिति ने स्पष्ट शब्दों में मांग की कि निर्दोष लोगों को फंसाने के बजाय वास्तविक अपराधियों की पहचान कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि समाज में न्याय का भरोसा कायम रह सके। 
प्रेस वार्ता के दौरान 17 जनवरी को प्रस्तावित झारखंड बंद को लेकर भी जानकारी दी गई। समिति ने बताया कि यह बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आयोजित किया जाएगा। इस बंद को न केवल आदिवासी समाज, बल्कि विभिन्न सामाजिक वर्गों और संगठनों का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है, ताकि सोमा मुंडा को न्याय दिलाया जा सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
शुक्रवार को निकाले गए मशाल जुलूस में बड़ी संख्या में आदिवासी समन्वय समिति के सदस्य एवं आम लोग शामिल हुए। जुलूस करम अखाड़ा, खूंटी से प्रारंभ होकर भगत सिंह चौक होते हुए नेताजी चौक तक गया और पुनः करम अखाड़ा पहुंचकर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। पूरे मार्ग में न्याय की मांग और अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी को लेकर नारे लगाए गए। 
मशाल जुलूस में आदिवासी समन्वय समिति खूंटी के अध्यक्ष चंद्र प्रभात मुंडा, मार्शल बारला, चार्ल्स पाहन, नरेश तिर्की सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी ने आंदोलन को और अधिक मजबूती प्रदान की।



