Ranchi: झारखंड के लिए विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) में भागीदारी केवल एक औपचारिक वैश्विक संवाद नहीं, बल्कि भारत के विकास पथ में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखी जा रही है। राज्य सरकार का मानना है कि दावोस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर मौजूदगी झारखंड के लिए निवेश, रणनीतिक साझेदारी और दीर्घकालिक आर्थिक दृष्टिकोण को आकार देने का अहम अवसर है।
दावोस वह मंच है, जहां निवेश की संभावनाएं ठोस रूप लेती हैं, वैश्विक गठबंधन बनते हैं और विकास, स्थिरता व लचीलेपन से जुड़ी नीतियों पर सहमति बनती है। यहां विचार साझेदारियों में बदलते हैं और नीति, पूंजी, नवाचार व विकास एक साझा दिशा में आगे बढ़ते हैं। ऐसे मंच पर झारखंड की भागीदारी राज्य की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करती है।
खनिज संपदा से भरपूर झारखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। कोयला, लौह अयस्क, तांबा, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का विशाल भंडार राज्य को भारत के औद्योगिक, ऊर्जा और आधारभूत संरचना विकास में अहम योगदानकर्ता बनाता है। इसके साथ ही भूमि, मानव संसाधन और मजबूत औद्योगिक आधार झारखंड को राष्ट्रीय विकास की धुरी के रूप में स्थापित करते हैं।
समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र और आदिवासी बहुल समाज के कारण झारखंड सतत और समावेशी विकास की अगली कहानी लिखने की पूरी क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास को प्रकृति के साथ सामंजस्य में आगे बढ़ाने की सोच के साथ काम कर रही है। यही दृष्टिकोण विश्व आर्थिक मंच के सतत विकास, विश्वास और दीर्घकालिक परिवर्तन के एजेंडे से मेल खाता है।
अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर चुके युवा राज्य झारखंड की दावोस में मौजूदगी केवल प्रतिनिधित्व भर नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का संकेत है। यह दर्शाता है कि झारखंड अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से जुड़ने और उत्तरदायी निवेश आकर्षित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पहली बार झारखंड को मिला सीधा वैश्विक संवाद का अवसर
पिछले पांच दशकों से अधिक समय से विश्व आर्थिक मंच राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों, वैश्विक कंपनियों के सीईओ, वित्तीय संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के लिए एक प्रमुख संवाद मंच रहा है। इस मंच पर झारखंड को पहली बार वैश्विक निवेशकों, स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों, वित्तीय संस्थानों, विनिर्माण कंपनियों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं से सीधे संवाद का अवसर मिला है।
इस सहभागिता के माध्यम से झारखंड खुद को केवल कच्चे संसाधनों के स्रोत के रूप में नहीं, बल्कि मूल्यवर्धित उद्योगों, उत्तरदायी खनन, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण अनुकूल विकास और सतत आपूर्ति शृंखलाओं के एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।



