Ranchi: झारखंड में सत्तारूढ़ झामुमो–कांग्रेस गठबंधन के भीतर हाल के दिनों में कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी से बेचैनी और असहजता बढ़ती जा रही है। खासकर घाटशिला उपचुनाव से पहले यह विवाद सरकार के लिए राजनीतिक सिरदर्द बनता जा रहा है।
🔹 वित्त मंत्री के बयान से शुरू हुआ विवाद
गठबंधन में तनाव की शुरुआत वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के बयान से हुई। उन्होंने अनुसूचित जाति आयोग के गठन में देरी को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा और उसे मीडिया में सार्वजनिक कर दिया। इस कदम से सरकार असहज हो गई है। कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मंत्री ऐसी बात कैबिनेट बैठक या पार्टी मंच पर उठा सकते थे, मीडिया में बयान देना अनुशासनहीनता है।
🔹 प्रदीप बलमुचु ने जताई गठबंधन टूटने की आशंका
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार बलमुचु ने कहा कि झामुमो कांग्रेस के अलावा विकल्प तलाश रहा है, और जरूरत पड़ने पर पार्टी टूट की स्थिति भी बन सकती है। बलमुचु खुद घाटशिला सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, जबकि यह सीट गठबंधन समन्वय के तहत झामुमो को दी गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह नाराजगी अब सार्वजनिक रूप से दिखने लगी है।
🔹 डीजीपी प्रकरण ने बढ़ाई असहजता
एक अन्य विवाद डीजीपी के इस्तीफे की खबरों से जुड़ा है। मीडिया में रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस नेता केएन त्रिपाठी ने सार्वजनिक रूप से पूर्व एडीजी अनुराग गुप्ता की गिरफ्तारी की मांग की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र वाले मामलों पर कांग्रेस नेताओं की खुली टिप्पणी गठबंधन के भीतर असहमति को और गहरा रही है।
🔹 विपक्ष हमलावर, कांग्रेस नेतृत्व मौन
इन विवादों पर प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि कांग्रेस की आंतरिक कलह और बयानबाजी से गठबंधन की स्थिरता पर खतरा मंडरा रहा है।
🔹 राजनीतिक हलकों में चर्चा
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि घाटशिला उपचुनाव के पहले ऐसे बयानों से गठबंधन की एकजुटता पर असर पड़ सकता है, विपक्ष को सत्ता पक्ष के भीतर मतभेद का मुद्दा मिल गया है, और कांग्रेस नेतृत्व की नियंत्रण क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं।



