Ghatshila : आगामी घाटशिला उपचुनाव (Ghatshila By-Election 2025) से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के पूर्व ग्रामीण जिलाध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सौरव चक्रवर्ती, घाटशिला मंडल अध्यक्ष कौशिक कुमार, मुसाबनी के पूर्व मंडल अध्यक्ष तुषारकांत पातर और सोशल मीडिया प्रभारी सुरेश महाली ने भाजपा छोड़कर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का दामन थाम लिया।
इन नेताओं को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची में झामुमो की सदस्यता दिलाई। सूत्रों के अनुसार, चक्रवर्ती और अन्य स्थानीय नेताओं की नाराजगी टिकट वितरण और संगठन में उपेक्षा को लेकर थी।
यह भाजपा के लिए एक सियासी झटका माना जा रहा है, क्योंकि सौरव चक्रवर्ती को हाल ही में घाटशिला उपचुनाव में स्टार प्रचारक प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई थी।
बताया जाता है कि सौरव चक्रवर्ती पहले भी 2024 के विधानसभा चुनाव में पूर्व सीएम चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन को टिकट दिए जाने से असंतुष्ट थे। उस समय पार्टी ने उन्हें मनाने में सफलता हासिल की थी, लेकिन इस बार उनकी नाराजगी चरम पर पहुंच गई।

चक्रवर्ती को घाटशिला के पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडू का करीबी माना जाता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उनके झामुमो में शामिल होने से घाटशिला में भाजपा की स्थिति कमजोर हो सकती है, खासकर ग्रामीण और संगठनात्मक स्तर पर।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि “झामुमो सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। सौरव चक्रवर्ती जैसे कर्मठ और जमीनी नेताओं के आने से संगठन को मजबूती मिलेगी।”
वहीं, भाजपा नेताओं ने इस कदम को “व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का परिणाम” बताया और दावा किया कि इससे पार्टी की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।



