Jamshedpur: जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (DGGI) ने 250 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा किया। इस मामले में मुख्य आरोपी, लोहा व्यापारी प्रदीप कलबलिया, को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बोकारो में गिरफ्तारी के दौरान 50 लाख रुपये से अधिक की नकदी और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। यह गिरोह पांच राज्यों में फैला हुआ था और फर्जी बिलिंग के माध्यम से जीएसटी चोरी कर रहा था।
DGGI टीम ने लंबे समय की जांच के बाद प्रदीप को मंगलवार को बोकारो के चास स्थित उसके आलीशान अपार्टमेंट से धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद उसे जमशेदपुर लाया गया। यहां एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वास्थ्य जांच पूरी करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
गिरफ्तारी के दौरान प्रदीप के ठिकाने से 50 लाख रुपये से अधिक नकद, कई कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, पेनड्राइव, फर्जी चालान बुक और डिजिटल सबूत जब्त किए गए। इसके साथ ही इस घोटाले में इस्तेमाल किए जा रहे कई बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया गया।
DGGI जमशेदपुर के अपर निदेशक सार्थक सक्सेना ने बताया कि यह सिंडिकेट बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। इनके नेटवर्क में झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और बिहार शामिल थे। गिरोह फर्जी कंपनियां बनाकर नकली बिलिंग के जरिए बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी कर रहा था।
घोटाले के तार लोहा-स्टील कारोबार से जुड़े थे। फर्जी इनवॉइस के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाकर सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुँचाया गया। DGGI ने पहले पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में प्रदीप कलबलिया की मुख्य भूमिका का खुलासा पाया था।
23 जुलाई को धनबाद के हीरापुर निवासी अवनीश जायसवाल और मटकुरिया के मो. फैजल खान को गिरफ्तार किया गया था। उनसे हुई पूछताछ में प्रदीप कलबलिया के सिंडिकेट में शामिल होने का पता चला। अब अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में इससे जुड़े कई अन्य सफेदपोश चेहरों का भी खुलासा हो सकता है।



