Godda: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर से कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। गोड्डा जिले में 13 वर्षीय बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में भाजपा विधायक दल के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 
मरांडी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह घटना केवल आत्महत्या नहीं बल्कि दुष्कर्म और हत्या का मामला प्रतीत होता है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
पिता ने उठाई हत्या की आशंका
मामला गोड्डा जिले के एक मदरसे से जुड़ा है, जहां बच्ची की पढ़ाई के लिए उसके पिता ने दाखिला कराया था। लेकिन एक दिन अचानक परिजनों को बुलाकर यह सूचना दी गई कि उनकी बेटी ने आत्महत्या कर ली है। पिता का कहना है कि उनकी बच्ची पहले से ही बेहद डरी-सहमी रहती थी। उन्हें संदेह है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि दुष्कर्म के बाद हत्या है। 
मदरसा प्रबंधन के व्यवहार पर सवाल
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि घटना के बाद मदरसा प्रबंधन का रवैया बेहद असंवेदनशील रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को दबाने और दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। मरांडी ने सवाल उठाया कि जब शिक्षा के नाम पर चल रहे किसी संस्थान में भी मासूम बच्चियाँ सुरक्षित नहीं हैं, तो समाज और सरकार को इस पर गंभीरता से सोचना होगा।
बच्चियों की सुरक्षा पर चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना केवल एक बच्ची तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मदरसों में पढ़ने वाली अन्य बच्चियों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि वहाँ पढ़ने वाली अन्य बच्चियाँ भी भय और आशंका के माहौल में जी रही होंगी।
सरकार पर साधा निशाना
मरांडी ने राज्य सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “जब सरकार के मंत्री केवल राजनीतिक लाभ के लिए आदिवासी महिला के साथ दुष्कर्म का प्रयास करने वाले आरोपी के घर मुआवज़ा देने पहुँच जाते हों, तो अपराधियों को कानून का भय कैसे होगा?”
उन्होंने आरोप लगाया कि घटना को हुए 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उल्टा, मामले को दबाने और लीपापोती करने की कोशिशें साफ़ नज़र आ रही हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग
मरांडी ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए। दोषियों को सख्त से सख्त सज़ा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी मासूम बच्ची के साथ इस तरह की घटना दोबारा न हो।



