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मलेरिया खत्म करने की दिशा में बड़ी सफलता: भारत ने बनाई पहली स्वदेशी वैक्सीन AdFalciVax

नई दिल्ली: भारत ने मलेरिया उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपना पहला स्वदेशी वैक्सीन उम्मीदवार (AdFalciVax) विकसित कर लिया है। यह टीका Plasmodium falciparum नामक परजीवी के ख़िलाफ़ कारगर साबित हो सकता है, जो देश में मलेरिया का सबसे खतरनाक कारण माना जाता है।

यह उपलब्धि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के तहत क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (भुवनेश्वर), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च (NIMR) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी (DBT-NII) के वैज्ञानिकों ने मिलकर हासिल की है।

 

दोहरे स्तर पर सुरक्षा देने वाला टीका

AdFalciVax एक मल्टी-स्टेज वैक्सीन है, यानी यह मलेरिया परजीवी के जीवनचक्र के दो अहम चरणों पर एक साथ प्रहार करता है।

1. पहला, वह चरण जब परजीवी मानव शरीर को संक्रमित करने की कोशिश करता है।

2. दूसरा, वह चरण जब परजीवी मच्छर के जरिए दूसरों तक फैल सकता है।

इस तरह यह वैक्सीन न केवल इंसान को बचाता है, बल्कि संक्रमण की कड़ी को भी तोड़ने में मददगार साबित हो सकता है।

 

तकनीकी विशेषताएँ

इस वैक्सीन को Lactococcus lactis नामक सुरक्षित खाद्य-ग्रेड बैक्टीरिया की मदद से तैयार किया गया है।

प्री-क्लिनिकल जांचों में यह पाया गया कि टीका कमरे के तापमान पर 9 महीने से अधिक समय तक स्थिर रहता है।

यह गुण इसे ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों तक पहुँचाने में बेहद सहूलियत देगा, जहाँ कोल्ड-चेन व्यवस्था अक्सर मुश्किल होती है।

 

अभी मानव परीक्षण बाकी

फिलहाल यह वैक्सीन प्री-क्लिनिकल चरण में है। यानी, इसका परीक्षण अब तक केवल प्रयोगशालाओं और पशु मॉडल्स पर हुआ है। अगले चरण में इसे मानव परीक्षण (ह्यूमन ट्रायल) के लिए परखा जाएगा।

ICMR ने तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि दवा कंपनियाँ इसका उत्पादन और आगे के परीक्षण कर सकें।

 

भारत का लक्ष्य: 2030 तक मलेरिया-मुक्ति

भारत सरकार ने 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है। हर साल लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या बच्चों और गर्भवती महिलाओं की होती है। ऐसे में AdFalciVax का सफल होना मलेरिया नियंत्रण की दिशा में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

 

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह वैक्सीन बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो यह न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को मलेरिया-मुक्त बनाने में मदद कर सकती है। साथ ही, स्वदेशी उत्पादन से इसकी लागत भी कम होगी और उपलब्धता भी अधिक।

 

👉 यह खबर लोगों में उम्मीद जगाती है कि आने वाले वर्षों में मलेरिया का खात्मा अब केवल सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन सकता है।

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