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पलामू एनकाउंटर: नक्सली प्रेस विज्ञप्ति के बाद बढ़ा सियासी बवाल, बाबूलाल मरांडी ने पुलिस की भूमिका पर उठाया सवाल।

Ranchi: पलामू जिले में हाल ही में हुए पुलिस और नक्सलियों के बीच एनकाउंटर का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुठभेड़ में दो जवानों – संतन कुमार और सुनील राम – ने शहादत दी थी। घटना के तुरंत बाद इसे नक्सली मुठभेड़ बताया गया था, लेकिन अब नक्सली संगठन द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी करने के बाद पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं। 

नक्सलियों का दावा: “पुलिस साजिश का शिकार हुए जवान”

नक्सली संगठन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर साफ किया है कि दोनों जवानों की मौत उनकी गोलियों से नहीं हुई है। नक्सलियों ने आरोप लगाया कि पुलिस के वरीय अधिकारियों की साजिश के तहत ही जवानों की हत्या की गई। विज्ञप्ति में लिखा गया है कि दुःख की इस घड़ी में वे शहीद जवानों के परिवारों के साथ हैं, लेकिन इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही, दोषी अधिकारियों और जवानों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी की गई है।

भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने उठाए सवाल

नक्सलियों की ओर से बयान सामने आने के बाद अब राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट करते हुए पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा—

“पलामू में उग्रवादियों से पुलिस मुठभेड़ में दो जवानों के शहीद होने के मामले में उग्रवादी संगठन द्वारा अपनी संलिप्तता से इंकार करने के बाद पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।”

मरांडी ने झारखंड सरकार से मांग की है कि इस घटना की जांच उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश के नेतृत्व में विशेष कमेटी से कराई जाए ताकि मुठभेड़ की सच्चाई सामने आ सके।

शहादत को नमन, पर निष्पक्ष जांच की मांग

बाबूलाल मरांडी ने एनकाउंटर वाले दिन भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी थी। उन्होंने लिखा था कि जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी और समाज में शांति स्थापित करने के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान को सदैव याद किया जाएगा। हालांकि, अब उनका रुख सख्त होता दिख रहा है और वे स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

राजनीतिक रंग में लिपटा एनकाउंटर

फिलहाल, नक्सलियों की प्रेस विज्ञप्ति और भाजपा की ओर से उठाए गए सवालों के बाद यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। अब निगाहें झारखंड सरकार पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील प्रकरण में आगे क्या कदम उठाती है।

कुल मिलाकर, पलामू एनकाउंटर अब केवल एक सुरक्षा घटना नहीं रहा, बल्कि यह सुरक्षा एजेंसियों की कार्यशैली और राजनीतिक दावों के बीच टकराव का मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस पर और भी बड़े राजनीतिक बयान और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

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