Palamu: झारखंड सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए एक खास पहल की गई है, जिसे “गरिमा केंद्र” (जेंडर रिसोर्स सेंटर) के नाम से जाना जाता है। यह एक ऐसा मंच है, जहां महिलाएं बिना किसी डर या झिझक के अपनी समस्याएं खुलकर रख सकती हैं और स्थानीय स्तर पर ही उनका समाधान भी किया जाता है।
गरिमा केंद्र का गठन राज्य के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया गया है और इसका संचालन झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के माध्यम से होता है। यह केंद्र महिलाओं से जुड़े अपराध, घरेलू हिंसा, सामाजिक कुरीतियों और शोषण जैसे मामलों को गंभीरता से लेता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस व अन्य विभागों के साथ भी समन्वय करता है।
झारखंड के पलामू जिले में इसकी खास पहल देखने को मिल रही है, जहां शुरुआती दौर में 12 गरिमा केंद्र खोले गए हैं। अब तक इन केंद्रों के माध्यम से 400 से अधिक मामलों का समाधान किया जा चुका है। यहां आसपास के कई पंचायतों की महिलाएं आकर अपनी समस्याएं साझा करती हैं और सामूहिक प्रयास से समाधान निकाला जाता है।
गरिमा केंद्र की खास बात यह है कि यह सिर्फ शिकायत सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में भी काम करता है। उदाहरण के तौर पर, एक महिला को ‘डायन’ कहकर प्रताड़ित किया जा रहा था—गरिमा केंद्र ने बैठक कर उसे सम्मान दिलाया और स्वरोजगार से भी जोड़ा। वहीं, एक अन्य मामले में घरेलू हिंसा झेल रही महिला को तत्काल राहत दिलाई गई।
बाल विवाह रोकने में भी यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एक मामले में नाबालिग लड़की की शादी कराई जा रही थी, लेकिन गरिमा केंद्र के हस्तक्षेप से शादी रुकवाई गई और लड़की की पढ़ाई दोबारा शुरू करवाई गई। इससे साफ है कि यह पहल केवल समस्या सुलझाने ही नहीं, बल्कि भविष्य सुधारने का भी काम कर रही है।
गरिमा केंद्र घरेलू हिंसा, यौन शोषण, बाल विवाह, अंधविश्वास समेत कई सामाजिक मुद्दों पर काम करता है। यहां दो पैरा लीगल वॉलंटियर और 5-7 सदस्य मिलकर कार्य करते हैं। साथ ही, स्थानीय जनप्रतिनिधि और मुखिया भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाते हैं, जिससे गांव स्तर पर ही मामलों का समाधान संभव हो पाता है।
कुल मिलाकर, गरिमा केंद्र ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभरा है। यह न केवल उनकी आवाज को मंच देता है, बल्कि उन्हें जागरूक, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रहा है।


