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आदिवासी समाज को दिग्भ्रमित करने वालों पर कार्रवाई की मांग, राष्ट्रीय महासम्मेलन आयोजित करने का सुझाव

Khunti: आदिवासी अगुआ सुशील पाहन ने आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और इतिहास को लेकर भ्रामक प्रचार करने वाले लोगों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग पहचान, अस्तित्व, संस्कृति, सभ्यता, भाषा और समृद्ध इतिहास है, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।

सुशील पाहन ने आरोप लगाया कि समाज के ही कुछ लोग खुद को बड़ा समाजसेवी और जानकार बताकर आदिवासियों के बारे में भ्रामक और तथ्यों से परे तर्क दे रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से “सरना और सनातन एक हैं”, “आदिवासी हिंदू जनजाति हैं” और “आदिवासी वनवासी हैं” जैसे दावों को गलत बताया। उनके अनुसार, इस तरह के तर्क न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि समाज को गुमराह करने का काम भी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग मीडिया में बने रहने के उद्देश्य से इस तरह के बयान देते हैं, जिससे आदिवासी समाज के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। यह प्रवृत्ति समाज के लिए घातक है और इसके खिलाफ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

इस संदर्भ में सुशील पहान ने सुझाव दिया कि सुतियाम्बेगढ़ में राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी महासम्मेलन का आयोजन किया जाए। इस महासम्मेलन में आदिवासी समाज के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव पारित किए जाएं और उसी आधार पर समाज के लिए आगे की दिशा तय की जाए।

उन्होंने कहा कि समाज को सही इतिहास और सही दिशा देने के लिए एकजुट होकर कार्य करने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सही जानकारी मिल सके और समाज की पहचान सुरक्षित रह सके।

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