‘Dhurandhar: The Revenge’ अपने पहले पार्ट की सफलता के बाद बड़े कैनवास पर लौटती है। इस बार फिल्म सिर्फ बदले और गैंगवार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन जैसे मुद्दों को जोड़कर एक बड़ा नैरेटिव पेश करने की कोशिश करती है। फिल्म कई जगह प्रभावित करती है, लेकिन कुछ हिस्सों में उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती।
फिल्म की कहानी जसकीरत सिंह रांगी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने परिवार के साथ हुए अन्याय के बाद अपराध की दुनिया में उतरता है। जेल से बाहर आने के बाद वह देश के लिए काम करता है और पाकिस्तान में हमजा अली मजारी बनकर अंडरकवर मिशन पर जाता है। कहानी में गैंगवार, सत्ता की लड़ाई और “बड़े साहब” का रहस्य मुख्य केंद्र में रहता है। हालांकि, जिस सस्पेंस को काफी बड़ा बनाया गया है, उसका खुलासा उतना असरदार नहीं लगता। फर्स्ट हाफ थोड़ा धीमा है, लेकिन सेकंड हाफ में फिल्म पकड़ बना लेती है।

रणवीर सिंह फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने दो अलग-अलग किरदारों में शानदार बॉडी लैंग्वेज और इमोशन दिखाए हैं। आर. माधवन अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से फिल्म को मजबूती देते हैं, जबकि संजय दत्त का रोल सीमित लेकिन प्रभावी है। अर्जुन रामपाल इस बार उतना असर नहीं छोड़ पाते, वहीं सारा अर्जुन को कम स्क्रीन टाइम के बावजूद नोटिस किया जाता है।
डायरेक्टर आदित्य धर ने फिल्म का स्केल बड़ा रखा है। असली घटनाओं से जुड़ी डिटेलिंग और रिसर्च नजर आती है, लेकिन यही चीज कई बार फिल्म को भारी और थोड़ा डॉक्यूमेंट्री जैसा बना देती है। सिनेमैटोग्राफी और एक्शन सीक्वेंस शानदार हैं, खासकर क्लाइमैक्स में बैकग्राउंड स्कोर प्रभाव छोड़ता है। हालांकि एडिटिंग और टाइट हो सकती थी।
‘धुरंधर: द रिवेंज’ एक एंटरटेनिंग और बड़े स्केल की फिल्म है, जिसमें रणवीर सिंह की दमदार परफॉर्मेंस आपको बांधे रखती है। अगर आप एक्शन, पॉलिटिकल ड्रामा और थ्रिल पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपको पसंद आ सकती है—बस थोड़ी लंबाई और स्लो पेस के लिए तैयार रहें।



