Khunti: खूंटी जिले में सोमवार और मंगलवार को अचानक बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बेमौसम तेज बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खासकर आम, तरबूज और सब्जी की खेती को व्यापक क्षति हुई है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

जानकारी के अनुसार, कई क्षेत्रों में तेज हवा के साथ गिरे ओलों ने फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया। इस समय आम के बगीचों में मंजर (फूल) लगे हुए थे, जो ओलावृष्टि के कारण बड़ी मात्रा में झड़ गए। इससे इस वर्ष आम की पैदावार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि वे इस बार अच्छी फसल की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन अचानक आए इस प्राकृतिक बदलाव ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया।
सब्जी उत्पादक किसानों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा है। टमाटर, बैंगन, गोभी, मिर्च सहित कई सब्जियों की फसलें ओलों की मार से पूरी तरह खराब हो गई हैं। कर्रा प्रखंड के घुनसूली गांव के तरबूज उत्पादक किसान एवं ग्राम प्रधान लाल सिंह मुंडा ने बताया कि पहले से ही खेती की लागत लगातार बढ़ रही थी, जिससे किसान परेशान थे, और अब इस आपदा ने उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है।
उसी गांव के किसान रूपेश कुमार ने बताया कि उन्होंने छह एकड़ जमीन में तरबूज की खेती की थी, लेकिन ओलावृष्टि से पूरी फसल बर्बाद हो गई। उन्होंने कहा कि बारिश से ज्यादा नुकसान ओलों की वजह से हुआ है, जिसने खासकर तरबूज और आम की फसल को पूरी तरह चौपट कर दिया।
घुनसूली के ही किसान सिकंदर महतो ने बताया कि उन्होंने करीब डेढ़ एकड़ जमीन में प्याज और टमाटर की खेती की थी, लेकिन ओलावृष्टि के कारण उनकी सारी मेहनत बेकार हो गई। उन्होंने जिला प्रशासन से मुआवजे की मांग करते हुए कहा कि बिना सरकारी सहायता के नुकसान की भरपाई करना मुश्किल होगा।
इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी ऋषिकेश कुमार ने कहा कि ऐसे मौसम में फसलों की सुरक्षा के लिए उचित प्रबंधन जरूरी होता है, लेकिन अचानक आई ओलावृष्टि से बचाव करना लगभग असंभव होता है। उन्होंने बताया कि यदि प्रभावित किसान मुआवजे के लिए आवेदन देते हैं, तो अंचलाधिकारी के माध्यम से नुकसान का आकलन कराया जाएगा और नियमानुसार हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में हुए नुकसान की सूचना संबंधित विभाग को दें, ताकि जल्द से जल्द सर्वे कर राहत की प्रक्रिया शुरू की जा सके। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुए इस नुकसान ने एक बार फिर किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डाला है, और अब उनकी निगाहें सरकार से मिलने वाली सहायता पर टिकी हैं।



