Ranchi: राजधानी रांची स्थित Central University of Jharkhand (CUJ) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग को लेकर नई पहल की तैयारी शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर ने कहा है कि भारत AI के क्षेत्र में विश्व शक्ति बनने की क्षमता रखता है और झारखंड जैसे राज्य इस बदलाव के केंद्र बन सकते हैं।
उन्होंने यह बातें नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit के बाद एक विशेष बातचीत में कहीं।
AI पर वैश्विक सोच में बदलाव
प्रो. मेधेकर ने कहा कि दिल्ली में आयोजित समिट ने AI को लेकर वैश्विक विमर्श को केवल सुरक्षा चिंताओं से हटाकर जनसंख्या स्तर पर उसके व्यावहारिक उपयोग की दिशा में मोड़ा है। समिट का समापन ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ के साथ हुआ, जिस पर अमेरिका, चीन और फ्रांस सहित 88 देशों ने हस्ताक्षर किए।
उनके अनुसार, यह पहला अवसर है जब भारत ने विश्व को AI के सकारात्मक और व्यावहारिक उपयोग पर गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया है।
CUJ में AI और रिसर्च को बढ़ावा
कुलपति ने बताया कि CUJ को ‘रिसर्च इंटेंसिव यूनिवर्सिटी’ के रूप में विकसित करने की योजना है। क्वांटम फिजिक्स के सहयोग से AI और मशीन लर्निंग आधारित पाठ्यक्रमों और शोध गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा। सभी फैकल्टी को शोध कार्य के लिए प्रोत्साहित किया गया है ताकि विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान मजबूत हो सके।
उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की असली पहचान उसके शोध कार्य से बनती है। बेहतर रिसर्च से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान के साथ-साथ फंडिंग के अवसर भी बढ़ते हैं।
झारखंड में AI की बहुआयामी संभावनाएं
प्रो. मेधेकर ने कहा कि खनिज संपदा और उद्योगों के लिए प्रसिद्ध झारखंड में AI के व्यापक उपयोग की संभावनाएं हैं।
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कृषि क्षेत्र: राज्य की 90 प्रतिशत से अधिक कृषि भूमि वर्षा पर निर्भर है। AI आधारित सटीक खेती (प्रिसिजन फार्मिंग) जल उपयोग को अनुकूलित कर सकती है और फसल रोगों की भविष्यवाणी कर पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती है।
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खनन और इस्पात उद्योग: भारी मशीनरी के पूर्वानुमानित रख-रखाव और भूमिगत खदानों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने में AI उपयोगी हो सकता है।
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भाषा और डिजिटल अवसंरचना: आधार, यूपीआई और भाषिनी जैसे प्लेटफॉर्म के साथ AI के एकीकरण से 1.4 अरब लोगों के लिए भाषा संबंधी बाधाएं कम हो रही हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब केवल वैश्विक टेक कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय डेटा और सांस्कृतिक संदर्भों के अनुरूप AI मॉडल विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
स्टार्टअप और नवाचार को मिलेगा बल
कुलपति ने कहा कि AI आधारित गतिविधियों से स्वास्थ्य, कृषि और अन्य क्षेत्रों में कम लागत वाले प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकते हैं। इससे स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी।
“लंग्स ऑफ रांची” बनेगा CUJ कैंपस
इंटरनेट मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच प्रो. मेधेकर ने कहा कि विश्वविद्यालय कैंपस को “लंग्स ऑफ रांची” के रूप में विकसित करने की योजना है। मानसून सत्र से बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें फलदार और छायादार पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए वन विभाग से भी समन्वय किया जा रहा है।
उन्होंने विश्वास जताया कि AI और हरित परिसर की संयुक्त पहल CUJ को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट पहचान दिलाएगी।



