Khunti: भगवान बिरसा मुंडा के पूर्वजों ने कल्याण मंत्री चमरा लिंडा से मुलाकात कर भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातु में “जीवन-वृतांत राष्ट्रव्यापी कला-संस्कृति जतरा” आयोजित कराने की मांग की। इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को एक विस्तृत मांगपत्र सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के आदिवासी समाज के महानायक और प्रेरणास्रोत हैं। उनके जीवन, संघर्ष, त्याग और बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से उनकी जन्मस्थली उलिहातु में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाना चाहिए। प्रस्तावित जतरा में देश के विभिन्न राज्यों से कलाकारों और प्रतिभागियों को आमंत्रित कर उनके माध्यम से बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित नृत्य-नाटक, लोकगीत, पारंपरिक नृत्य, नाट्य मंचन एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित करने का सुझाव दिया गया।
प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी राज्यों के प्रतिभागियों को अपनी-अपनी लोक संस्कृति प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए। बेहतर प्रदर्शन करने वाले कलाकारों एवं दलों को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाए, ताकि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को बढ़ावा मिल सके। साथ ही इस प्रकार का आयोजन क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी प्रोत्साहित करेगा।
कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की विरासत का संरक्षण और प्रचार-प्रसार सरकार की प्राथमिकता है तथा इस दिशा में विभागीय स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
मंत्री से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल में भगवान बिरसा मुंडा के वंशज बुधराम मुंडा और जॉनी कुमारी शामिल थे। इनके साथ मार्शल बारला, बहा लिंडा तथा जीतेन सोय भी उपस्थित रहे। सभी ने संयुक्त रूप से मांगपत्र सौंपते हुए जन्मस्थली उलिहातु को राष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान दिलाने की अपील की।



