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चतरा में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का बदला स्थान, अब इटखोरी में होगी स्थापना

Chhathra: जिले में प्रस्तावित मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का स्थान बदल दिया गया है। पहले यह प्लांट सदर प्रखंड के लक्षणपुर गांव में स्थापित किया जाना था, लेकिन तकनीकी जांच के बाद अब इसे इटखोरी प्रखंड मुख्यालय स्थित कृषि फार्म की भूमि पर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यहां कृषि फार्म की करीब 10 एकड़ जमीन पर 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की स्थापना होगी।

तकनीकी टीम ने इटखोरी को बताया उपयुक्त

झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की संयुक्त तकनीकी टीम ने हाल के महीनों में इटखोरी कृषि फार्म का स्थल निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान भूमि की उपलब्धता, परिवहन सुविधा, आसपास के बाजार और दूध उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए टीम ने इटखोरी को प्लांट स्थापना के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना।

एनओसी प्रक्रिया तेज, साल के अंत तक लक्ष्य

प्लांट स्थापना के लिए जमीन की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादन महासंघ के प्रबंध निदेशक जयदेव बिस्वास ने 26 सितंबर 2025 को उपायुक्त कीर्तिश्री जी को पत्र लिखकर एनओसी की मांग की थी। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि इस वर्ष के अंत तक प्लांट का संचालन शुरू हो जाए, इसके लिए तेजी से काम किया जा रहा है।

तीन साल से लंबित थी योजना

मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की योजना करीब तीन वर्षों से लंबित थी। पहले तत्कालीन उपायुक्त अबु इमरान ने इस दिशा में पहल की थी, लेकिन योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। इसके बाद उपायुक्त रहे रमेश घोलप के कार्यकाल में भी परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई। वर्तमान उपायुक्त कीर्तिश्री जी ने झारखंड राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ और NDDB के साथ पत्राचार कर इस परियोजना को दोबारा गति दी है।

NDDB होगी क्रियान्वयन एजेंसी

इस मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की क्रियान्वयन एजेंसी नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) होगी। प्लांट की क्षमता 50 हजार लीटर प्रतिदिन होगी, जिसे तकनीकी टीम ने पूरी तरह व्यवहारिक और क्षेत्र के लिए उपयुक्त बताया है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

इटखोरी में प्लांट स्थापित होने से न सिर्फ चतरा, बल्कि हजारीबाग, बरही और चौपारण जैसे आसपास के इलाकों में उपलब्ध अधिशेष दूध का समुचित उपयोग हो सकेगा। इससे दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उपायुक्त कीर्तिश्री जी ने कहा कि पहले लक्षणपुर गांव का चयन किया गया था, लेकिन संयुक्त तकनीकी टीम ने इटखोरी कृषि फार्म की जमीन को अधिक उपयुक्त पाया है। एनओसी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और प्रशासन की कोशिश है कि प्लांट इसी साल शुरू हो जाए।

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