Khunti: खूंटी जिले का चकोम्दा गांव आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर सामने आ रहा है। यह गांव मुरहू प्रखंड के बिंदा पंचायत अंतर्गत आता है और यहां लगभग 200 लोग निवास करते हैं। जिला मुख्यालय खूंटी से यह गांव लगभग 20 किलोमीटर और प्रखंड मुख्यालय मुरहू से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 
गांव की सबसे बड़ी समस्या सड़क सुविधा की है। आज़ादी के दशकों बाद भी इस गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंच पाई है। स्थिति यह है कि आपातकालीन हालात में एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। डिलीवरी पेसेंट या गंभीर मरीजों की जान पर अक्सर संकट बन जाता है क्योंकि गांव तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती है।
पानी की किल्लत भी बड़ी चुनौती
ग्रामीणों के सामने पेयजल की समस्या भी कम गंभीर नहीं है। गांव में एक सोलर वॉटर पंप लगाया गया है, लेकिन उसकी स्थिति यह है कि कुछ परिवारों तक ही पानी पहुंच पाता है। बाकी लोगों को आज भी चुआँ के भरोसे जीना पड़ रहा है।
शिक्षा के लिए लंबा सफर
चकोम्दा में प्राथमिक शिक्षा तक की व्यवस्था है, लेकिन उसके बाद बच्चों को पढ़ाई के लिए 5 से 10 किलोमीटर दूर बिंदा या मुरहू जाना पड़ता है। इसका असर खासकर लड़कियों की शिक्षा पर साफ देखा जा सकता है।
सरकारी लाभ से वंचित, खुद के भरोसे ग्रामीण
गांव के लोग बताते हैं कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ न के बराबर मिला है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उन्हें अब सरकार से उम्मीद करना व्यर्थ लग रहा है। इसी कारण अब ग्रामीण खुद अपने हालात बदलने की राह पर हैं। 
16 सितंबर को श्रमदान से सड़क बनाने का फैसला
गांव में आज हुई साप्ताहिक बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि 16 सितंबर, मंगलवार को वे श्रमदान कर गांव तक सड़क खुद बनाएंगे। इस फैसले से यह साफ झलकता है कि यहां के लोग सरकारी व्यवस्था के भरोसे न रहकर खुद की मेहनत और सामूहिक एकजुटता से अपनी तकदीर लिखने के लिए तैयार हैं।

गांव की पहल बनी मिसाल
चकोम्दा गांव के इस कदम ने एक बड़ा संदेश दिया है कि जब सरकारी मशीनरी लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तब जनता अपनी एकजुटता से वह काम कर सकती है, जिसे सालों से अनदेखा किया जाता रहा है।



