Ranchi : रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) का 46वां स्थापना दिवस विश्वविद्यालय परिसर में धूमधाम से मनाया गया। मुख्य समारोह बिरसा कृषि महाविद्यालय के सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें झारखंड के राज्यपाल एवं कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। साथ ही विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को राज्यपाल द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की वार्षिक उपलब्धियों की रिपोर्ट का भी लोकार्पण किया गया।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध का वास्तविक लाभ खेतों की मेढ़ तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि BAU केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदों का केंद्र है, और इसका सीधा प्रभाव कृषि समुदाय के जीवन पर पड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अब अपने पांच दशकों की उपलब्धियों की ओर बढ़ रहा है और यह समय नई दिशा और नए लक्ष्यों को निर्धारित करने का है। राज्यपाल ने जलवायु परिवर्तन के दौर में पर्यावरण अनुकूल खेती और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया।

उन्होंने कृषि शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि कृषि के विद्यार्थी केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजन करने वाले बनें। उनके अनुसार, जब किसान समृद्ध होगा तभी गांव और देश दोनों आगे बढ़ेंगे।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों, मत्स्य पालकों, पशुपालकों और मधुमक्खी पालकों को भी सम्मानित किया। उन्होंने किसानों के योगदान को राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा की नींव बताया और उनके सम्मान को आवश्यक करार दिया।

BAU के कुलपति डॉ. सुधीर चंद्र दुबे ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि 1981 में स्वतंत्र विश्वविद्यालय बनने के बाद से BAU ने कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। हालांकि उन्होंने मानव संसाधन की कमी को एक बड़ी चुनौती बताया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की चुनौतियों और संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्य सुजय रक्षित ने कहा कि झारखंड में कृषि की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन मिट्टी के क्षरण और मानव संसाधन की कमी चिंता का विषय है। उन्होंने वर्षा जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई।
समारोह के अंत में राज्यपाल ने कहा कि वैज्ञानिकों और कृषि संस्थानों का वास्तविक मूल्यांकन तभी होगा जब उनकी तकनीक किसानों के खेतों तक पहुंचे और उसका सीधा लाभ दिखाई दे।



