Khunti: 54 लाख रूपये भुगतान में से 30 लाख रूपये घुस लेने के मामले में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की बड़ी कार्रवाई। मृत शिक्षक फ्रांसिस तोपनो के नाम पर वर्षों तक वेतन निकासी, कथित घूसखोरी और विभागीय मिलीभगत के आरोपों के बीच सरकार ने खूंटी की जिला शिक्षा पदाधिकारी अपरूपा पॉल चौधरी पर विभागीय कार्रवाई करते हुए उनकी दो वेतनवृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक लगा दी है।
यह कार्रवाई स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के संकल्प संख्या 655 (08.04.2025), विभागीय पत्रांक 61 (09.01.2026) तथा कारण पृच्छा पत्रांक 484 (16.03.2026) के आधार पर की गई है।
मामले के अनुसार, एसपीजी मध्य विद्यालय तांबा, रनिया के पूर्व शिक्षक स्वर्गीय फ्रांसिस तोपनो के अवरुद्ध वेतन मद में जुलाई 2011 से मार्च 2020 तक कुल 54,22,377 रुपये की निकासी हुई। लेकिन कथित तौर पर आरोप है कि इस राशि में से लगभग 30 लाख रुपये विभागीय बाबुओं द्वारा घूस के रूप में वसूले गए, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब खूंटी के समाजसेवी दिलीप मिश्रा ने मुख्य सचिव और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मृत शिक्षक के नाम पर वेतन भुगतान और राशि निकासी बिना वैध प्रक्रिया और सत्यापन के की गई। शिकायत के बाद विभाग ने जांच शुरू की और कई गंभीर तथ्य सामने आए।
जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि बिना रोकड़ बही, उपस्थिति पंजी, सेवा सत्यापन और अन्य अभिलेखों की जांच के भुगतान प्रक्रिया पूरी की गई। इतना ही नहीं, मार्च 2015 से अक्टूबर 2015 तक वेतन का दोहरी भुगतान भी किया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा आयकर नियमों के तहत टीडीएस कटौती नहीं करने का मामला भी दर्ज हुआ।
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह रहा कि फ्रांसिस टोपनो वर्ष 2018 से लकवाग्रस्त होकर अस्पताल में कोमा में थे, बावजूद इसके मार्च 2020 तक उनके नाम पर वेतन भुगतान जारी रहा। इससे विभागीय निगरानी और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
इस पूरे प्रकरण में विभागीय लिपिक चक्रधारी बड़ाईक की भूमिका भी जांच में संदिग्ध पाई गई। जांच में उनकी संलिप्तता सामने आने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही खूंटी से उनका स्थानांतरण कर अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, लोहरदगा में पदस्थापित किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, भुगतान प्रक्रिया और फाइल संचालन में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।
जांच के दौरान कई गवाहों के बयान में शिक्षकों, लिपिकों और अधिकारियों के बीच संभावित सांठगांठ की बात भी सामने आई है। कुछ बयानों में यह भी कहा गया कि भुगतान संबंधी दस्तावेज स्कूल में तैयार नहीं हुए, बल्कि बाहरी स्तर पर तैयार कर प्रक्रिया पूरी कराई गई।
सरकार ने उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही, वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला माना है। इस कार्रवाई ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
अब स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि सिर्फ डीईओ और एक लिपिक तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि इस पूरे नेटवर्क में शामिल सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और कथित घूसखोरों के साथ साथ अल्पसंख्यक विद्यालय के संदिग्ध शिक्षकों की भी निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए। यह मामला शिक्षा विभाग में वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें उजागर करता है।



