Ranchi : झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल चरम पर पहुंच गई है। चुनावी गणित और संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के बीच अब राज्य की राजनीति में ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ की भी एंट्री हो गई है। एनडीए ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए रांची के एक पांच सितारा होटल में ठहराने की रणनीति अपनाई है, ताकि मतदान तक सभी विधायक पार्टी के संपर्क में रहें और किसी तरह की राजनीतिक उठापटक से बचा जा सके।
राज्यसभा की दो सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। विधानसभा में झामुमो के पास 34 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए पहली प्राथमिकता के 28 मतों की आवश्यकता होती है। ऐसे में उनके लिए जीत का रास्ता लगभग साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि दूसरी सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प और प्रतिस्पर्धी बन गया है।
दूसरी सीट के लिए कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी आमने-सामने हैं। राजनीतिक दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और संभावित क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए लगातार रणनीति बना रहे हैं। इसी कड़ी में एनडीए ने अपने सभी विधायकों को एक स्थान पर रखने का फैसला लिया है।
भाजपा विधायक रोशन लाल चौधरी सबसे पहले होटल पहुंचे और उन्होंने बताया कि सभी विधायकों को अगले दो दिनों तक साथ रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक जनार्दन पासवान भी होटल पहुंच चुके हैं। पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य मतदान तक विधायकों के बीच समन्वय बनाए रखना और किसी भी अप्रत्याशित राजनीतिक स्थिति से बचना है।
विधानसभा के मौजूदा समीकरणों के अनुसार, कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को कांग्रेस के 16, राजद के 4, भाकपा (माले) के 2 और झामुमो के संभावित 6 अतिरिक्त वोट मिलने की उम्मीद है। यदि यह गणित जस का तस बना रहता है, तो वे 28 मतों का आवश्यक आंकड़ा हासिल कर सकते हैं। इसी कारण कांग्रेस नेतृत्व भी पूरी तरह सक्रिय है और लगातार सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठकों का दौर जारी है।
दूसरी ओर, एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी चुनावी मुकाबले को और रोचक बना रहे हैं। एनडीए के पास भाजपा के 21, जदयू के 1, आजसू के 1 और लोजपा (रामविलास) के 1 विधायक सहित कुल 24 वोट हैं। जीत के लिए उन्हें कम से कम चार अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए नाथवानी ने हाल के दिनों में एनडीए नेताओं और विधायकों से लगातार संपर्क और बैठकें की हैं।
राज्यसभा चुनाव से पहले दोनों खेमों की सक्रियता यह संकेत देती है कि दूसरी सीट पर मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है। जहां सत्तारूढ़ गठबंधन अपने विधायकों की एकजुटता बनाए रखने में जुटा है, वहीं एनडीए भी अतिरिक्त समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में 18 जून का मतदान न केवल राज्यसभा की दूसरी सीट का फैसला करेगा, बल्कि झारखंड की वर्तमान राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधन प्रबंधन की भी परीक्षा साबित होगा।



