Palamu : पलामू जिले के कोनवाई गांव में भीषण गर्मी और गहराते पेयजल संकट के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। पानी की गंभीर समस्या से परेशान लोगों ने कोनवाई बस स्टैंड के पास पांकी-मेदिनीनगर मुख्य मार्ग को जाम कर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लंबे समय से स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। जल जीवन मिशन के तहत लगाए गए जलमीनार और नल-जल योजनाओं से लोगों को नियमित पानी नहीं मिल रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई परियोजनाएं धरातल पर प्रभावी साबित नहीं हुई हैं, जिसके चलते लोगों को आज भी पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग बाल्टी, बर्तन और पानी के खाली डिब्बे लेकर सड़क पर बैठ गए। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की कि गांव में जल्द से जल्द पेयजल आपूर्ति बहाल की जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गर्मी के इस मौसम में पानी की कमी ने रोजमर्रा का जीवन बेहद कठिन बना दिया है।

धरना का नेतृत्व कर रहीं मुखिया मंजू देवी ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार विभाग और अधिकारी ग्रामीणों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में लोग पीने के पानी के लिए परेशान हैं, लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था दुरुस्त की जाती, तो लोगों को सड़क पर उतरने की नौबत नहीं आती।
ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत गांव में जलमीनार और पाइपलाइन तो बिछाई गई, लेकिन नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को घर-घर पानी उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में वे केवल कागजों और ढांचों तक सीमित रह गई हैं।
बृजदेव सिंह, बीरेंद्र सिंह, सुजित सोनी, लक्ष्मण सिंह और गीता देवी सहित कई ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक प्रशासन की ओर से पेयजल आपूर्ति बहाल करने का ठोस आश्वासन और प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर बार-बार आवाज उठाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
सड़क जाम के कारण पांकी-मेदिनीनगर मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया और दोनों ओर करीब दो किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग गई। राहगीरों, यात्रियों और वाहन चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ा। समाचार लिखे जाने तक ग्रामीण मौके पर डटे हुए थे और प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचकर समस्या के समाधान की दिशा में पहल करने का इंतजार कर रहे थे।



