Godda/Hazaribagh : विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर झारखंड के हजारीबाग, कोडरमा और गोड्डा जिलों में आयोजित रक्तदान शिविरों में लोगों, खासकर युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बड़ी संख्या में पहली बार रक्तदान करने वाले युवा भी शिविरों में पहुंचे और स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व को समझते हुए जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आए। इस दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी लोगों को नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित किया।
हजारीबाग में सुबह से ही रक्तदान शिविरों में युवाओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। प्रतिभागियों का कहना था कि रक्तदान केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि जीवन बचाने का उत्सव है। उनका मानना है कि एक यूनिट रक्त कई मरीजों के लिए जीवनदायी साबित हो सकता है। युवाओं ने यह भी कहा कि रक्तदान से स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता और इससे समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलता है।
रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने में सोशल मीडिया, नुक्कड़ नाटक और विभिन्न जनजागरूकता अभियानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी मुरली यादव ने पहली बार रक्तदान करने वाले युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि नई पीढ़ी का इस दिशा में आगे आना बेहद सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि रक्तदान से जुड़े पुराने डर और अंधविश्वास धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं और लोग इसके महत्व को समझने लगे हैं।
कोडरमा में विश्व रक्तदाता दिवस पर 45 वर्षीय रितेश माधव विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। जेजे कॉलेज में प्रधान सहायक के पद पर कार्यरत रितेश अब तक 87 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2000 में पहली बार रक्तदान किया था और तभी 101 बार रक्तदान करने का संकल्प लिया था। तब से वे हर तीन से चार महीने के अंतराल पर नियमित रूप से रक्तदान करते आ रहे हैं और कई जरूरतमंद मरीजों की मदद कर चुके हैं।
रितेश माधव ने बताया कि नियमित रक्तदान के बावजूद वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवनशैली अपनाते हैं। उनका कहना है कि रक्तदान से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि यह मानवता की सेवा का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से स्वेच्छा से रक्तदान करने और जरूरतमंदों की जान बचाने में योगदान देने की अपील की।
वहीं गोड्डा में भी विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने रक्तदान किया। हालांकि इस दौरान कुछ स्वयंसेवी संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के उस बयान पर नाराजगी जताई, जिसमें ब्लड बैंक में “ब्लड के बदले ब्लड” लेने की व्यवस्था समाप्त करने की बात कही गई थी। उनका तर्क था कि इस व्यवस्था से रक्तकोष में रक्त की निरंतर उपलब्धता बनी रहती है, जबकि थैलेसीमिया, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को पहले से ही विशेष छूट दी जाती है।
रेड क्रॉस सोसाइटी और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि रक्तदान के प्रति लोगों को लगातार जागरूक करने की जरूरत है ताकि ब्लड बैंकों में रक्त की कमी न हो और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सके। शिविरों के दौरान स्वेच्छा से रक्तदान करने वाले रक्तदाताओं को पुष्प देकर सम्मानित भी किया गया। इस अवसर ने यह संदेश दिया कि समाज में बढ़ती जागरूकता और युवाओं की सक्रिय भागीदारी भविष्य में स्वैच्छिक रक्तदान आंदोलन को और मजबूत बना सकती है।


