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नीति आयोग की बैठक में सीएम हेमंत सोरेन: झारखंड को मैन्युफैक्चरिंग हब और नॉलेज इकोनॉमी बनाने का रखा विजन

Ranchi :  नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए, जहां उन्होंने झारखंड के समग्र और संतुलित विकास का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उसे मानव संसाधन और उद्योग विकास से जोड़ा जाएगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य को केवल खनिज निकालने वाले क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि एक वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग हब और नॉलेज इकोनॉमी के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने केंद्र से क्रिटिकल मिनरल्स आधारित उद्योगों, रिसर्च सेंटर और इनोवेशन हब विकसित करने में सहयोग की मांग की।

सीएम ने कहा कि झारखंड में टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें बढ़ावा देने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि राज्य में एआई आधारित मिनरल एक्सप्लोरेशन और सस्टेनेबल माइनिंग प्रैक्टिसेज पर काम किया जा रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास को राज्य की विकास यात्रा का आधार बताया गया।

मुख्यमंत्री ने ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य के साथ झारखंड को नई दिशा देने की बात कही और कहा कि राज्य सरकार हर साल एक लाख से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ रही है। सारथी योजना के तहत 6.76 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 53 हजार महिलाओं को आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया गया है।

सीएम ने आंगनबाड़ी व्यवस्था का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य में 38 हजार केंद्रों में से 15 हजार के पास भवन नहीं हैं, फिर भी पोषण अभियान और SAAMAR कार्यक्रम से कुपोषण में सुधार हुआ है। राज्य सरकार अपने संसाधनों से 5000 नए आंगनबाड़ी भवन बना रही है।

शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस से अब बच्चों का चयन IIT और मेडिकल संस्थानों में होने लगा है। राज्य में 5000 उत्कृष्ट विद्यालय बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही पीएमश्री और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा झारखंड में NCERT का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने की मांग भी की गई।

बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें भी रखीं, जिनमें जल जीवन मिशन की बकाया 6000 करोड़ रुपये राशि जारी करने, कोयला कंपनियों से 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाया भुगतान, DMFT मानकों में संशोधन और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे मुद्दे शामिल थे।

इसके अलावा राज्य में छह नए मेडिकल कॉलेजों में से बचे दो को जल्द मंजूरी देने, खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी का अवसर देने और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी व सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की मांग भी की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड AI आधारित CM डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और डिजिटल सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को पंचायत स्तर तक पहुंचाने की दिशा में भी तेजी से काम चल रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं और 1.5 लाख एकड़ भूमि पर फलदार पौधरोपण किया गया है, जिससे कृषि और पोषण दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

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