Ranchi : रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने चर्चित बड़गाई जमीन मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ा कानूनी झटका दिया है। अदालत ने उनकी ओर से दाखिल जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने कहा कि मामले में उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य हैं।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस चरण पर साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण नहीं किया जाता, बल्कि यह देखा जाता है कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सामग्री आरोप तय करने के लिए पर्याप्त है या नहीं। अदालत के अनुसार, जांच एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपों की सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत करते हैं।
मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ईसीआईआर संख्या 06/2023 से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि बड़गाई मौजा की लगभग 8.86 एकड़ भूमि से संबंधित लेनदेन और दस्तावेजों में कथित अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
ईडी की जांच में भूमि संबंधी दस्तावेजों, रजिस्टरों और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। जांच के दौरान राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के पास से 17 मूल रजिस्टर और जमीन से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए थे। एजेंसी का दावा है कि उसने जमीन के स्वामित्व, नियंत्रण और कथित लाभार्थियों से संबंधित पर्याप्त सामग्री एकत्र की है।
अदालत ने अपने आदेश में गवाह संतोष मुंडा के बयान का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, वह लंबे समय तक संबंधित भूमि का केयरटेकर रहा और उसने मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई है, जिसे जांच के लिए अहम माना गया है।
अधिवक्ता संजय कुमार के अनुसार, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 3 जून को फैसला सुरक्षित रख लिया था और 8 जून को अपना आदेश सुनाया। अब मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिसके बाद गवाहों के बयान और नियमित ट्रायल शुरू होगा।
गौरतलब है कि बड़गाई जमीन मामला झारखंड की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। इसी प्रकरण में ईडी की कार्रवाई के दौरान हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था और उन्हें न्यायिक हिरासत का सामना भी करना पड़ा था। अब जमानत याचिका खारिज होने के बाद इस मामले की सुनवाई अगले चरण में प्रवेश करेगी।



