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राज्यसभा चुनाव के बहाने पलामू के एससी वोटबैंक पर झामुमो की नजर, बीजेपी के गढ़ में सेंधमारी की कोशिश

Palamu : झारखंड में राज्यसभा चुनाव के बहाने पलामू प्रमंडल की राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता बैद्यनाथ राम को राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर अनुसूचित जाति (एससी) वोटबैंक को साधने की बड़ी रणनीति तैयार की है। राजनीतिक जानकार इसे आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तैयारी के तौर पर देख रहे हैं।

दरअसल, पलामू प्रमंडल को झारखंड में अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्र माना जाता है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पलामू जिले में 27.65 प्रतिशत, गढ़वा में 12 प्रतिशत और लातेहार में 21.31 प्रतिशत एससी आबादी है। पूरे प्रमंडल में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 8.5 लाख बताई जाती है। ऐसे में झामुमो इस वोटबैंक में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में जुटा है।

बैद्यनाथ राम लातेहार जिले के रहने वाले हैं और पूर्व मंत्री के साथ-साथ विधायक भी रह चुके हैं। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में वे बेहद कम अंतर से चुनाव हार गए थे। अब उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर पार्टी अनुसूचित जाति समाज के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कर रही है। झामुमो को उम्मीद है कि इससे पलामू प्रमंडल में संगठन को मजबूती मिलेगी।

राजनीतिक दृष्टि से पलामू क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। पलामू लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इसके अलावा लातेहार और छतरपुर विधानसभा सीट भी एससी वर्ग के लिए सुरक्षित हैं। वर्ष 2009 में झामुमो के टिकट पर पूर्व माओवादी नेता कामेश्वर बैठा पलामू लोकसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन इसके बाद से पार्टी को इस क्षेत्र में अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

पलामू प्रमंडल की नौ विधानसभा सीटों में फिलहाल केवल भवनाथपुर सीट पर झामुमो का कब्जा है। वहीं भाजपा का इस क्षेत्र में मजबूत जनाधार माना जाता है। पलामू और चतरा लोकसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है, जबकि नौ विधानसभा सीटों में से चार पर बीजेपी के विधायक हैं। इसके अलावा दो सीटों पर राजद और दो सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं।

भाजपा नेताओं का कहना है कि अनुसूचित जाति मतदाता परंपरागत रूप से बीजेपी के साथ रहे हैं। बीजेपी जिला अध्यक्ष अमित तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा की मजबूत पकड़ है और बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति समुदाय पार्टी के साथ जुड़ा हुआ है।

वहीं झामुमो नेताओं का मानना है कि बैद्यनाथ राम को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने से दलित समाज में पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ेगी। झामुमो जिला अध्यक्ष राजेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि पार्टी सुप्रीमो हेमंत सोरेन की सोच दलित, शोषित, वंचित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों को साथ लेकर चलने की है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में एक दलित चेहरे को भेजने का फैसला कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा करेगा और आने वाले चुनावों में पार्टी का वोटबैंक मजबूत होगा।

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