Bokaro : बोकारो स्टील सिटी की आधुनिक पहचान के बीच कई बस्तियों के लोग आज भी स्वच्छ पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। माराफारी थाना क्षेत्र के बीएसएल लेबर हाउसिंग से सटे दर्जनों बस्तियों में रहने वाले करीब 15 हजार लोगों को साफ पानी के लिए रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
झोपड़ी कॉलोनी, कदम गाछ, जटान टोला, रांची टोला, आजाद नगर और धोबी मोहल्ला समेत कई इलाकों में स्थानीय ट्यूबवेलों का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है। इसके कारण लोगों को दूर-दराज के इलाकों से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
स्थानीय स्तर पर हुई जांच में इन क्षेत्रों के भूजल में टीडीएस (टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स) का स्तर 900 से 1000 पीपीएम से अधिक पाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार 500 पीपीएम से अधिक टीडीएस वाला पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। इससे लोगों में स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।
गैर सरकारी संस्था “बेहतर झारखंड” का दावा है कि भूजल में भारी धातुओं की मौजूदगी के कारण पानी अत्यधिक कठोर और क्षारीय हो गया है। यही वजह है कि अधिकांश लोग अपने मोहल्ले के ट्यूबवेल का पानी पीने से बच रहे हैं और वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर हैं।
वर्तमान में बड़ी संख्या में लोग बीएसएल एलएच स्थित विश्वकर्मा मैदान के पास लगे बोरिंग ट्यूबवेल से पानी भरने पहुंचते हैं। यहां पानी लेने के लिए लंबी कतारें लगती हैं और लोगों का काफी समय केवल पानी जुटाने में ही खर्च हो जाता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि रोजाना तीन से पांच घंटे केवल पानी लाने में लग जाते हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी भारी बर्तन लेकर लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि वर्षों से समस्या बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल सका है।
सबसे चिंता की बात यह है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अभी तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को भी इस समस्या की जानकारी नहीं होने की बात सामने आई है, जिससे लोगों में नाराजगी है।
मामले पर बोकारो स्टील प्लांट के सूचना प्रमुख डीके धान ने कहा कि संबंधित क्षेत्र प्लांट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है, इसलिए बीएसएल इस मामले में सीधे तौर पर हस्तक्षेप नहीं कर सकता। वहीं, बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि प्रभावित गांव बोकारो स्टील प्लांट से प्रभावित क्षेत्र में आते हैं और पानी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सेल की होनी चाहिए। इसके बावजूद जिला प्रशासन अपनी ओर से स्थिति की जांच कर आवश्यक कदम उठाएगा तथा प्रभावित लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टीम भेजेगा।


