Ranchi : झारखंड की राजनीति में स्वास्थ्य विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी द्वारा एफआईआर कराने की चेतावनी दिए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी भी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
जामताड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर राज्य सरकार को लगता है कि उन्होंने कोई गलत बात कही है, तो वह सीधे कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस दोनों उनके नियंत्रण में हैं, इसलिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में धमकी देने की बजाय सरकार चाहे तो उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। मरांडी ने चुनौतीपूर्ण अंदाज में कहा कि वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तरह गिरफ्तारी के डर से भागने वालों में नहीं हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में हुई कथित अनियमितताओं का मुद्दा तथ्यों और रिपोर्टों के आधार पर उठाया है। उन्होंने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ियों और प्रक्रियागत अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। उनके अनुसार मेडिकल उपकरणों, दवाओं की खरीद और अस्पताल निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं।
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई मामलों में कमीशनखोरी का खेल हुआ है। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस खरीद, दवा आपूर्ति और अन्य स्वास्थ्य परियोजनाओं में पारदर्शिता की कमी रही है। इसी आधार पर उन्होंने इन मामलों की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की थी।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग के गोदामों में करोड़ों रुपये की जीवनरक्षक दवाएं एक्सपायर होने के मामले सामने आए हैं। उनके मुताबिक यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने गंभीर आरोप और रिपोर्ट सामने हैं, तो सरकार जांच कराने के बजाय विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास क्यों कर रही है।
दरअसल, बाबूलाल मरांडी द्वारा स्वास्थ्य विभाग में कथित घोटालों और एंबुलेंस खरीद में अनियमितताओं का मुद्दा उठाने के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। मंत्री ने कहा था कि मरांडी द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं और जरूरत पड़ी तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने व्यंग्य करते हुए यह भी कहा था कि वे बाबूलाल मरांडी को एक दूरबीन भेंट करेंगे, ताकि वे स्वास्थ्य विभाग की वास्तविक स्थिति को बेहतर ढंग से देख सकें।
स्वास्थ्य विभाग को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। एक ओर विपक्ष स्वास्थ्य विभाग में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहा है, वहीं सरकार इन आरोपों को खारिज कर विपक्ष पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में और अधिक गर्मा सकता है।


