Ranchi : झारखंड समेत पूरे देश में डेमोग्राफी चेंज यानी आबादी के असामान्य बदलाव का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। केंद्र सरकार ने इस विषय के अध्ययन के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया है, जिसके अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर बनाए गए हैं। यह समिति एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी। माना जा रहा है कि झारखंड के संथाल परगना समेत कई संवेदनशील इलाकों का भी अध्ययन इस कमेटी के दायरे में होगा।
केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद झारखंड में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री Hemant Soren ने इस कमेटी के गठन पर सवाल उठाते हुए इसका विरोध किया है। रांची स्थित झारखंड मंत्रालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा जब से केंद्र की सत्ता में आई है, तब से लगातार इस तरह के मुद्दों को उठाया जा रहा है, लेकिन इनका ठोस परिणाम कभी सामने नहीं आया।
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि “ये लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता।” उन्होंने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इसी तरह के दावे किए गए थे, लेकिन आखिर उसका परिणाम क्या निकला, यह जनता जानती है। उन्होंने कहा कि अगर कहीं अवैध घुसपैठ या जनसंख्या असंतुलन जैसी समस्या है, तो उसे रोकना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।
हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार देश में महंगाई, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और आर्थिक चुनौतियां जैसे गंभीर विषय मौजूद हैं, लेकिन सरकार इन पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक माहौल बनाने में लगी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन देशों से भारत को सस्ते दामों पर पेट्रोल-डीजल मिल सकता था, वहां से खरीदारी क्यों नहीं की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के “विश्व गुरु” और “विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था” जैसे नारों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि देश को विश्व गुरु बनाने की बातें तो बहुत हुईं, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि अर्थव्यवस्था खुद संघर्ष कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा केवल कुछ चुनिंदा लोगों के हितों को ध्यान में रखकर राजनीति करती है, जबकि उनकी सरकार राज्य के आम लोगों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देती है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के कामकाज का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर चर्चा की गई। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य राज्य के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और प्रशासनिक कार्यों को बेहतर बनाना है।
हेमंत सोरेन ने अंत में Heavy Engineering Corporation (HEC) का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर उद्योगों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक समय देश की पहचान रहा एचईसी आज बंद होने की कगार पर है, लेकिन उस पर गंभीर चर्चा नहीं हो रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और रोजगार जैसे असली मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है, न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी पर।


