Ranchi : रांची के चान्हो (कदमटोली) में हुई घटना अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गई है, बल्कि राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपकर राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बीजेपी पर “सांप्रदायिक राजनीति” करने का आरोप लगाया है।
पूर्व मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के नेतृत्व में गठित बीजेपी जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू को सौंप दी। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए नीलकंठ सिंह मुंडा ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि घटना के चार दिन बीत जाने के बावजूद अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जो प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। बीजेपी का आरोप है कि प्रशासन मामले में “लीपापोती” कर रहा है और दोषियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।
बीजेपी नेता ने दावा किया कि चान्हो की घटना एक सामान्य विवाद नहीं बल्कि सुनियोजित हमला था। उनके अनुसार, सिंचाई पाइप टूटने जैसी छोटी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जिसे बाद में सांप्रदायिक रंग देकर बड़े हमले में बदल दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार पर भीड़ ने घर में घुसकर हमला किया, जिसमें महिलाओं और बच्चों तक को निशाना बनाया गया। बीजेपी ने इसे गंभीर और अमानवीय घटना बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
बीजेपी जांच टीम ने कहा कि पीड़ित परिवार, जो कथित रूप से अल्पसंख्यक समुदाय से है, को जानबूझकर निशाना बनाया गया। आरोप है कि हमले के दौरान महिलाओं के साथ मारपीट हुई और परिवार को गांव छोड़ने तक की धमकी दी गई।
पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह आंदोलन करेगी।
वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने बीजेपी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि बीजेपी हर घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करती है, जबकि देश के अन्य राज्यों में हो रही घटनाओं और महंगाई जैसे मुद्दों पर वह चुप रहती है।
जेएमएम का कहना है कि बीजेपी वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की राजनीति कर रही है और समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रही है।
चान्हो की घटना अब कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गई है। एक तरफ बीजेपी इसे प्रशासनिक विफलता और गंभीर अपराध बता रही है, तो दूसरी तरफ जेएमएम इसे राजनीतिक रूप से “भड़काया गया मुद्दा” बता रही है।
इस पूरे मामले ने झारखंड की राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गरमाने की संभावना है।



