Ranchi : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) 2026 की नियमावली में भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली को क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से बाहर किए जाने के मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से गठित पांच मंत्रियों की कमेटी की दूसरी बैठक भी बिना सर्वसम्मति के समाप्त हो गई। इस बैठक में कमेटी के सदस्य दो खेमों में बंटे नजर आए और मामला अब राजनीतिक तथा सामाजिक रूप से और अधिक संवेदनशील हो गया है।
मुख्यमंत्री Hemant Soren द्वारा गठित इस कमेटी में शामिल मंत्रियों के बीच चारों भाषाओं को लेकर मतभेद साफ दिखाई दिया। कांग्रेस कोटे से मंत्री Radhakrishna Kishore और Deepika Pandey Singh के साथ राजद कोटे के Sanjay Prasad Yadav ने भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली को क्षेत्रीय भाषा सूची में शामिल करने का समर्थन किया। वहीं झामुमो कोटे के मंत्री Yogendra Prasad और Sudivya Kumar Sonu इसके विरोध में रहे।
सूत्रों के अनुसार, कमेटी ने 3:2 के बहुमत से मुख्यमंत्री को भेजी जाने वाली अनुशंसा में इन चारों भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा सूची में शामिल करने की सिफारिश की है। यदि इस अनुशंसा को स्वीकार किया जाता है तो पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा, देवघर और गोड्डा जैसे जिलों के भाषा-भाषियों को जेटेट परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिल सकेगा। इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
बैठक के दौरान एक नया विवाद तब खड़ा हो गया जब मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कमेटी में किसी भी जनजातीय या अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधि मंत्री के शामिल नहीं होने का मुद्दा उठा दिया। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर बनी समिति में आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय की भागीदारी क्यों नहीं सुनिश्चित की गई। इस मुद्दे के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
कमेटी के संयोजक और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि यह कमेटी की दूसरी और फिलहाल अंतिम बैठक थी। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री समिति का पुनर्गठन कर उसमें जनजातीय और अल्पसंख्यक समुदाय के मंत्रियों को शामिल करते हैं, तभी आगे तीसरी बैठक हो सकती है। अन्यथा मौजूदा बैठक की कार्यवाही और सभी मंत्रियों की राय को शामिल करते हुए रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी जाएगी।
बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों की तैयारी पर भी सवाल उठे। पहली बैठक की तरह दूसरी बैठक में भी कार्मिक और शिक्षा विभाग के अधिकारी राज्य में बोली जाने वाली भाषाओं, संबंधित छात्रों की संख्या और शिक्षकों की उपलब्धता से जुड़े आवश्यक आंकड़े प्रस्तुत नहीं कर सके। इस पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने नाराजगी जाहिर करते हुए अधिकारियों की तैयारी पर सवाल खड़े किए और कहा कि इतने अहम विषय पर पूरी जानकारी के साथ उपस्थित होना जरूरी था।
फिलहाल कमेटी की अनुशंसा बहुमत के आधार पर चारों भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा सूची में शामिल करने के पक्ष में दिखाई दे रही है, लेकिन अंतिम फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेना है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री मौजूदा रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेते हैं या फिर समिति का पुनर्गठन कर मामले पर दोबारा विचार कराया जाएगा।


