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झारखंड में बड़ा नक्सली सरेंडर: एक साथ 25 माओवादियों के आत्मसमर्पण की तैयारी, सारंडा में घटेगा नक्सल प्रभाव

Ranchi : झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिलने जा रही है। राज्य के सारंडा जंगल क्षेत्र में सक्रिय करीब 25 माओवादी गुरुवार को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण करेंगे। यह कदम सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों का सरेंडर अब तक का सबसे बड़ा एकल-दिवसीय आत्मसमर्पण बताया जा रहा है।

सरेंडर करने वालों में संगठन के कई महत्वपूर्ण कमांडर और कैडर शामिल हैं, जिनमें छह सब जोनल कमांडर, छह एरिया कमांडर और 13 कैडर सदस्य हैं। इनमें लगभग 10 महिला माओवादी भी शामिल बताई जा रही हैं। सभी आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी अपने साथ हथियार भी जमा करेंगे, जिससे संगठन की कमर को बड़ा झटका लगेगा।

सूत्रों के अनुसार, ये माओवादी कुल 16 आधुनिक और देसी हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करेंगे। इनमें एलएमजी, इंसास, एसएलआर, एके-47 और .303 राइफल जैसे घातक हथियार शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस से लूटे गए करीब एक दर्जन से अधिक हथियार भी सरेंडर किए जाएंगे। साथ ही भारी मात्रा में कारतूस और मैगजीन भी पुलिस को सौंपे जाएंगे।

सरेंडर सूची में शामिल प्रमुख नामों में करण उर्फ डांगुर तियू, गादी मुंडा उर्फ गुलशन, नागेंद्र मुंडा उर्फ प्रभात मुंडा और रेखा मुंडा उर्फ जयंती जैसे कई सब जोनल और एरिया कमांडर शामिल हैं। इन पर राज्य के विभिन्न जिलों—चाईबासा, सरायकेला-खरसावां, रांची और खूंटी—में दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज हैं। कई माओवादियों पर लाखों रुपये का इनाम भी घोषित था।

सब जोनल कमांडर गादी मुंडा उर्फ गुलशन पर चाईबासा, सरायकेला और रांची सहित कई जिलों में 48 मामले दर्ज बताए गए हैं, जबकि नागेंद्र मुंडा उर्फ प्रभात मुंडा पर 38 से अधिक मामले दर्ज हैं। इसी तरह अन्य कमांडरों पर भी दर्जनों आपराधिक केस दर्ज हैं, जो लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बने हुए थे।

आत्मसमर्पण करने वालों में कुछ ऐसे माओवादी भी शामिल हैं जो लंबे समय से सारंडा क्षेत्र में सक्रिय थे और कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं। इनमें से कुछ के पास एके-47, एसएलआर और इंसास राइफल जैसे आधुनिक हथियार भी थे, जो अब वे पुलिस के सामने जमा करेंगे।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, सरेंडर करने वाले माओवादियों के पास से कुल 2857 कारतूस भी मिलने वाले हैं। इनमें इंसास और एसएलआर राइफलों के लिए बड़ी संख्या में गोलियां शामिल हैं। इसके साथ ही आठ वॉकी-टॉकी सेट भी पुलिस को सौंपे जाएंगे, जो नक्सली नेटवर्क में कम्युनिकेशन के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस सामूहिक आत्मसमर्पण के बाद सारंडा क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों में बड़ी कमी आएगी। विशेषकर एक करोड़ के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा के नेटवर्क पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा, क्योंकि कई सहयोगी अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल लंबे समय से सारंडा और आसपास के क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियान चला रहे हैं। लगातार दबाव, एनकाउंटर और विकास योजनाओं के चलते नक्सली संगठन कमजोर हो रहा है और बड़ी संख्या में कैडर मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला कर रहे हैं।

इस बड़े सरेंडर को राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी जो माओवादी हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहेंगे, उनके लिए सरकार पुनर्वास नीति के तहत मदद उपलब्ध कराएगी।

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