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झारखंड में ऐतिहासिक सरेंडर: 25 से अधिक नक्सलियों ने एक साथ छोड़ा हथियार, 33 लाख के इनामी भी मुख्यधारा में लौटे

Ranchi : झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। राज्य में पहली बार 25 से अधिक नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। यह घटना नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की लगातार कार्रवाई और रणनीतिक दबाव का परिणाम मानी जा रही है। आत्मसमर्पण करने वालों में 33 लाख रुपये तक के इनामी माओवादी भी शामिल हैं।

रांची स्थित धुर्वा के झारखंड पुलिस मुख्यालय में गुरुवार सुबह करीब 11 बजे आयोजित विशेष कार्यक्रम में सभी नक्सलियों ने औपचारिक रूप से हथियार डाल दिए। इस दौरान 25 भाकपा (माओवादी) और 2 जेजेएमपी संगठन के सदस्य भी मुख्यधारा में शामिल हुए। कुल मिलाकर 27 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जो राज्य गठन के बाद एक साथ सबसे बड़ी संख्या में सरेंडर माना जा रहा है।

सरेंडर करने वालों में संगठन के कई बड़े नाम शामिल हैं। इनमें सात सब जोनल कमांडर, सात एरिया कमांडर और 13 सक्रिय कैडर शामिल बताए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन सभी पर मिलाकर 426 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। आठ नक्सलियों पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जो इस सरेंडर को और भी महत्वपूर्ण बनाता है।

आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपे। इनमें लाइट मशीन गन (LMG), इंसास राइफल, एसएलआर, एक बोल्ट-एक्शन राइफल, एक पिस्टल, 31 मैगजीन और करीब 3000 जिंदा कारतूस शामिल हैं। यह बरामदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि ये हथियार लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा रहे थे।

सरेंडर करने वालों में प्रमुख नामों में गाडी मुंडा उर्फ ​​गुलशन, नागेंद्र मुंडा उर्फ ​​प्रभात मुंडा, रेखा मुंडा उर्फ ​​जयंती और सागेन अंगारिया उर्फ ​​डोको जैसे कई कुख्यात नक्सली शामिल हैं। इन पर चाईबासा, सरायकेला, रांची और खूंटी जैसे जिलों में दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज हैं और कई पर पांच लाख रुपये तक के इनाम घोषित थे।

इसके अलावा करण तियु, दर्शन हंसा और सुलेमान हंसा जैसे कई एरिया कमांडर और कैडर स्तर के माओवादी भी इस सरेंडर में शामिल रहे। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि पिछले कई महीनों से सारंडा क्षेत्र में चल रहे दबाव और लगातार सर्च ऑपरेशन के कारण ये माओवादी मुख्यधारा में लौटने को मजबूर हुए।

सरेंडर करने वालों में महिला नक्सलियों की भी बड़ी संख्या है। वंदना, सुनीता सरदार, बसंती देवगम, अनिशा कोड़ा और सपना उर्फ सुरू कालुंडिया जैसी कैडर सदस्य भी इस सूची में शामिल हैं, जिन पर विभिन्न थानों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनके आत्मसमर्पण से नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।

जेजेएमपी संगठन के दो सदस्य भी इस सामूहिक सरेंडर का हिस्सा रहे। इनमें सचिन बैक और श्रवण गोप शामिल हैं। सचिन बैक पर पांच लाख रुपये का इनाम था और उसके खिलाफ छह आपराधिक मामले दर्ज थे, जबकि श्रवण गोप के खिलाफ आठ मामले दर्ज बताए गए हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े आत्मसमर्पण के बाद सारंडा और आसपास के नक्सल प्रभावित इलाकों में उग्रवादी गतिविधियां काफी हद तक कमजोर हो जाएंगी। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम न केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए राहत है, बल्कि यह संकेत भी है कि राज्य में नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है।

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