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गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना पर संकट: 6083 आवेदनों में से सिर्फ 2647 स्वीकृत, बैंकिंग सिस्टम की धीमी रफ्तार से छात्रों की चिंता बढ़ी

Ranchi : झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना की रफ्तार बेहद धीमी है। हजारों छात्रों के आवेदन लंबित हैं, जिससे राज्यभर में विद्यार्थियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

शिक्षा के सपनों पर आर्थिक बोझ भारी

मैट्रिक और इंटर का रिजल्ट आने के बाद राज्य में कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया तेज हो गई है। इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ और अन्य प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्र आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना उनके लिए बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग ही दिखाई दे रही है।

योजना का उद्देश्य और लाभ

झारखंड सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत 10वीं और 12वीं पास छात्रों को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए 15 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण रियायती ब्याज दर पर दिया जाता है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बिना रुकावट उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि कोई भी प्रतिभाशाली छात्र सिर्फ पैसों की कमी के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे।

आवेदन और स्वीकृति के आंकड़े चौंकाने वाले

विभागीय आंकड़ों के अनुसार योजना की प्रगति अपेक्षा से काफी कम रही है। अब तक कुल 6083 आवेदन बैंकों को भेजे गए हैं, लेकिन इनमें से केवल 2647 आवेदन ही स्वीकृत हो पाए हैं। वहीं वास्तविक रूप से केवल 1955 छात्रों को ही ऋण राशि प्राप्त हो सकी है।

वित्तीय आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। अब तक कुल स्वीकृत राशि 238.04 करोड़ रुपये है, जबकि वितरित राशि मात्र 63.87 करोड़ रुपये रही है। इसके अलावा सरकारी सहायता के रूप में केवल 37,50,016 रुपये ही जारी किए गए हैं।

बैंकों की धीमी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल

योजना के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा बैंकों की धीमी और असमान प्रक्रिया को माना जा रहा है। कई मामलों में आवेदन स्वीकृत होने के बावजूद ऋण वितरण में देरी हो रही है। विभागीय स्तर पर इस मुद्दे को कई बार उठाया गया है, लेकिन स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं देखा गया है।

छात्रों का कहना है कि कॉलेजों में एडमिशन की अंतिम तिथियां नजदीक हैं, लेकिन लोन स्वीकृति में हो रही देरी उनके भविष्य पर असर डाल रही है।

राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज

इस योजना की धीमी गति को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए इसे असफल योजना बताया है। भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने आरोप लगाया कि वित्त विभाग के आंतरिक आदेशों के कारण बैंक जानबूझकर ऋण स्वीकृत नहीं कर रहे हैं और इसे उन्होंने सरकार की “सोची-समझी साजिश” करार दिया है।

कांग्रेस ने केंद्र पर लगाया आरोप

वहीं सत्ताधारी कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्र सरकार पर पलटवार किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बैंकिंग सिस्टम पर राजनीतिक दबाव और सहयोग की कमी के कारण योजना प्रभावित हो रही है। कांग्रेस महासचिव राकेश सिन्हा ने कहा कि यह योजना राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

छात्रों की बढ़ती चिंता और समाधान की मांग

विद्यार्थी संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि लंबित आवेदनों को जल्द से जल्द स्वीकृत कर राशि वितरित की जाए। उनका कहना है कि अगर प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई तो कई योग्य छात्र नए शैक्षणिक सत्र में दाखिला लेने से वंचित रह सकते हैं।

फिलहाल, गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना छात्रों के लिए उम्मीद भी बनी हुई है और चुनौती भी। सरकार और बैंकिंग व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय की कमी इस योजना की सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आई है।

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