Palamu : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JET)-2026 को लेकर पलामू प्रमंडल से एक बड़ा सामाजिक मुद्दा सामने आया है। सामाजिक संगठन जन जागृति एवं कल्याण केंद्र ने राज्यपाल के समक्ष ज्ञापन सौंपकर परीक्षा व्यवस्था में कई अहम बदलावों की मांग की है। संगठन ने क्षेत्रीय भाषाओं को परीक्षा में शामिल करने, न्यूनतम आयु सीमा कम करने और भाषा आधारित अलग पलामू राज्य गठन तक की मांग उठाई है। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज कर दी है।
संगठन के सचिव राहुल कुमार उर्फ राहुल क्रांति ने कहा कि पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों में बड़ी संख्या में लोग मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषाएं बोलते हैं। इसके बावजूद JET-2026 में नागपुरी भाषा को प्राथमिकता दिए जाने से स्थानीय युवाओं को नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि पलामू प्रमंडल के अधिकांश अभ्यर्थी नागपुरी भाषा से परिचित नहीं हैं, जिससे परीक्षा में उनकी प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है।
संगठन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार स्थानीय भाषाई वास्तविकता को नजरअंदाज कर रही है। उनका कहना है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगिता में क्षेत्रीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व होना जरूरी है, ताकि सभी क्षेत्रों के युवाओं को समान अवसर मिल सके।
जन जागृति एवं कल्याण केंद्र ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2013 और 2016 की शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषाओं को शामिल किया गया था। लेकिन JET-2026 में इन भाषाओं को हटाए जाने से स्थानीय अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ गया है।
संगठन का कहना है कि इन भाषाओं को बाहर करना स्थानीय छात्रों और युवाओं के हितों के खिलाफ है। उनका मानना है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्रीय पहचान और संस्कृति का भी हिस्सा है। ऐसे में क्षेत्रीय भाषाओं को परीक्षा से हटाना लाखों युवाओं के साथ अन्याय के समान है।
JET-2026 की न्यूनतम आयु सीमा को लेकर भी संगठन ने गंभीर आपत्ति जताई है। वर्तमान में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष निर्धारित की गई है। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) और केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) के नियमों के अनुसार न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए।
राहुल क्रांति ने कहा कि राज्य की वर्तमान व्यवस्था के कारण कई योग्य और प्रशिक्षित युवा परीक्षा में शामिल होने से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि आयु सीमा को घटाकर 18 वर्ष किया जाए, ताकि अधिक से अधिक युवा शिक्षक बनने का अवसर प्राप्त कर सकें।
इस पूरे मुद्दे के दौरान संगठन ने भाषा और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर अलग पलामू राज्य गठन की मांग भी उठाई। संगठन का कहना है कि पलामू प्रमंडल की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान झारखंड के अन्य हिस्सों से अलग है। इसके बावजूद यहां की क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता।
संगठन का आरोप है कि लगातार उपेक्षा के कारण स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। उनका मानना है कि प्रशासनिक और भाषाई दृष्टिकोण से अलग राज्य बनने पर क्षेत्र के लोगों को बेहतर प्रतिनिधित्व और विकास का अवसर मिलेगा।
संगठन ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि स्थानीय युवाओं और क्षेत्रीय भाषाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते इन मांगों पर विचार नहीं किया गया तो असंतोष और बढ़ सकता है।
राहुल कुमार उर्फ राहुल क्रांति ने कहा कि सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिसमें किसी भी क्षेत्र, भाषा या वर्ग के साथ भेदभाव की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मामलों में सभी युवाओं को समान अवसर मिलना चाहिए।
JET-2026 को लेकर उठी ये मांगें आने वाले दिनों में राज्य सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन सकती हैं। क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय युवाओं के अधिकारों को लेकर पलामू प्रमंडल में पहले भी आवाज उठती रही है। अब शिक्षक पात्रता परीक्षा के माध्यम से यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
यदि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार करती है तो इससे क्षेत्रीय असंतोष कम हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन और विरोध की संभावना भी बढ़ सकती है।


