Ranchi : आलमगीर आलम को मनी लॉन्ड्रिंग और कथित टेंडर घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद बुधवार को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से रिहा कर दिया गया। करीब दो वर्षों तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद उनकी जेल से रिहाई हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आलमगीर आलम और उनके पूर्व आप्त सचिव संजीव लाल को जमानत दे दी थी। हालांकि तकनीकी कारणों और आदेश की औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण मंगलवार को उनकी रिहाई नहीं हो सकी थी। आदेश अपलोड होने और आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुधवार को उन्हें जेल से बाहर आने की अनुमति मिली।

जानकारी के अनुसार, आलमगीर आलम की पत्नी निशात आलम जमानतदार बनीं। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें होटवार जेल से रिहा किया गया। जेल से बाहर आने के दौरान उनके समर्थकों और परिचितों की भी मौजूदगी देखने को मिली।
पूर्व मंत्री आलमगीर आलम पर कथित टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोप हैं। जांच एजेंसियों द्वारा कार्रवाई के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। मामला राज्य में काफी चर्चित रहा और राजनीतिक गलियारों में भी इसे लेकर लगातार चर्चा होती रही।

आलमगीर आलम और उनके सहयोगियों ने पहले विशेष अदालत और फिर हाई कोर्ट में जमानत की मांग की थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। जुलाई 2025 में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत देने का फैसला सुनाया।
पूर्व मंत्री लगभग 23 महीने से न्यायिक हिरासत में थे। इतने लंबे समय बाद जेल से बाहर आने को उनके समर्थक बड़ी राहत के तौर पर देख रहे हैं। दूसरी ओर विपक्षी दल इस मामले को भ्रष्टाचार और सरकारी अनियमितताओं से जोड़कर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
आलमगीर आलम की रिहाई के बाद झारखंड की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी वापसी का असर राज्य की सियासी गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल अदालत में मामला विचाराधीन है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।



